गुजरात : बिजली डिमांड में 36.6 प्रतिशत की उछाल, केंद्र से अतिरिक्त 5,000 मेगावाट की मांग की गई

गांधीनगर, 20 अक्टूबर . Gujarat में 16 अक्टूबर को बिजली की अब तक की सबसे अधिक मांग 29,822 मेगावाट दर्ज की गई. यह पिछले साल अक्टूबर में दर्ज की गई 21,822 मेगावाट की मांग से 36.6 प्रतिशत अधिक है. इसके चलते राज्य Government ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, बैटरी स्टोरेज का विस्तार करने और केंद्र से अतिरिक्त बिजली आवंटित करने की मांग की है.
राज्य में बिजली की दैनिक खपत 16 अक्टूबर को बढ़कर 574 मिलियन यूनिट हो गई, जो पिछले साल अक्टूबर में 457 मिलियन यूनिट थी. यह लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि है.
Tuesday को Chief Minister भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में दी गई प्रस्तुति के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में सितंबर और अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग में लगभग 12 प्रतिशत (यानी 4,000 मेगावाट) की वृद्धि हुई है.
Chief Minister आवास पर हुई इस बैठक में किसानों, उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की गई. साथ ही, Gujarat की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई.
इस बैठक में ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.
Government ने मांग में इस वृद्धि का कारण कमजोर मानसून के बाद लगातार बना हुआ उच्च तापमान और ‘अल नीनो’ के प्रभाव को बताया है, जिसके कारण कूलिंग से जुड़ी बिजली की खपत बढ़ गई है.
कृषि क्षेत्र में भी बिजली की मांग बढ़ी है, क्योंकि Government खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध करा रही है. इससे कृषि क्षेत्र का दैनिक लोड 12,000 मेगावाट के पीक स्तर तक पहुंच गया है.
दीपावली से पहले औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से भी बिजली की मांग बढ़ी है. प्रस्तुति में बताया गया कि Gujarat और पड़ोसी राज्यों में कम बारिश होने से जलविद्युत उत्पादन कम हो गया है, जबकि हवा की गति कम होने से पवन ऊर्जा के उत्पादन पर भी असर पड़ा है.
सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाता है, जिससे शाम के पीक आवर्स (शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच) में बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इस दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्य Government कोयले और गैस पर आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भर है.
बैठक में बताया गया कि ‘स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर’ और बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड की फ्रीक्वेंसी और संतुलन बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं.
कोयले की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए, राज्य Government ने दिल्ली में उच्च-स्तरीय चर्चा की, ताकि ‘Gujarat स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (जीएसईसीएल) के लिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने Gujarat को नवंबर तक हर दिन कोयले की 10 से 11 रेलवे रेक (मालगाड़ी के डिब्बे) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है. नवंबर के बाद यह आपूर्ति बढ़कर 13 से 14 रेक प्रतिदिन हो जाएगी.
राज्य के बिजली संयंत्रों में कोयले के इस्तेमाल की कार्यक्षमता सुधारने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं. Gujarat ने नवंबर के लिए एनटीपीसी के फरक्का संयंत्र से 329 मेगावाट बिजली और केंद्रीय बिजली उत्पादन में असम के हिस्से से लंबी अवधि के लिए 551 मेगावाट बिजली हासिल की है.
एनटीपीसी के बरौनी-I और दादरी-I थर्मल पावर स्टेशनों के साथ 716 मेगावाट बिजली खरीद के मौजूदा समझौते की अवधि को एक साल बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दिया गया है. राज्य ने केंद्र के ‘अनएलोकेटेड पावर पूल’ (बिना आवंटित बिजली के भंडार) से अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की भी मांग की है.
इसके साथ ही, Government ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज’ क्षमता का भी विस्तार कर रही है, ताकि दिन के समय बनने वाली सौर ऊर्जा को स्टोर किया जा सके और शाम के पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है) में उसका इस्तेमाल किया जा सके.
Gujarat में अभी 192 मेगावाट क्षमता का ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (बीईएसएस) काम कर रहा है. इसके अलावा, कुल 2,742 मेगावाट क्षमता और 5,517 मेगावाट हॉवर (एमडब्ल्यूएच) स्टोरेज क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए अनुबंध पूरे किए जा चुके हैं.
राज्य में दिन के समय लगभग 12,000 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा होती है. राज्य Government इसका अधिकतम उपयोग करने की योजना बना रही है, जिसमें कृषि कार्यों के लिए बिजली की खपत को दिन के उजाले वाले घंटों में तय करना भी शामिल है.
उम्मीद है कि Gujarat ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ‘शक्ति’ योजना के तहत 4,000 मेगावाट के लिए टेंडर जारी करेगा, जिससे 2030-31 से बिजली की आपूर्ति शुरू होने की संभावना है.
इसके अलावा, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ 4,200 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस परियोजना की पहली इकाई के 2032 में चालू होने की उम्मीद है.
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एससीएच/एबीएम


