
गाजीपुर, 6 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सकरा गांव में चकबंदी के दौरान जमीन के चक बदले जाने और सड़क किनारे की जमीनों पर निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है. इस मामले में जंगीपुर से Samajwadi Party के विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव पर जबरन जमीन कब्जा करने के आरोप लगे हैं, जिस पर विधायक ने सफाई देते हुए सभी आरोपों को बेबुनियाद और Political मंशा से प्रेरित बताया है.
Tuesday को से बातचीत में सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा, “जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं. इसके पीछे साफ तौर पर Political मकसद है.”
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले ही हो चुकी है और उन्हें दोबारा जांच से कोई आपत्ति नहीं है.
विधायक ने कहा, “जिला मजिस्ट्रेट और उनसे पहले के जिला मजिस्ट्रेट भी इस मामले की जांच कर चुके हैं. हमारे चकबंदी अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले को देखा है. उन्हें फिर से जांच करने दीजिए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है.”
दरअसल, यह पूरा मामला गाजीपुर के सकरा गांव का है, जहां चकबंदी प्रक्रिया के दौरान जमीनों के चक बदले जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे स्थित गाटों पर अवैध रूप से निर्माण करने की कोशिश की जा रही है.
इसी को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. शिकायतकर्ता दुर्गेश यादव का आरोप है कि चकबंदी के दौरान 10 से 15 लोगों की लगभग 15 से 20 बीघा जमीन के चक उनकी मूल जगह से करीब तीन किलोमीटर दूर कर दिए गए हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है.
दुर्गेश यादव ने इस मामले में जंगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव पर भी आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि सड़क किनारे की कीमती जमीनों पर कब्जे के उद्देश्य से चकों में हेरफेर की गई है. यह मामला साल 2022-23 से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में लंबित है.
दूसरी तरफ, Samajwadi Party के विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जबरन जमीन कब्जा करने के आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और Political मंशा से प्रेरित हैं.
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पीआईएम/एबीएम