चिदंबरम ने सीजेआई के फॉर्म-6 स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए सीईसी पर साधा निशाना

New Delhi, 6 अक्टूबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने Tuesday को कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने साफ कहा है कि Supreme Court ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है.

एसआईआर और सीईसी को हटाने की मांग को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ये बातें कही हैं. सीजेआई सूर्यकांत के उस बयान के बाद यह प्रदर्शन किया गया, जिसमें उन्होंने साफ किया था कि Supreme Court ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक्सरसाइज के दौरान इलेक्टोरल रोल में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 के किसी भी मॉडिफाइड वर्जन को मंजूरी नहीं दी है. यह टिप्पणी सीईसी ज्ञानेश कुमार पर केस चलाने की मांग वाली एक पिटीशन पर सुनवाई करते हुए दी गई थी.

पत्रकारों से बातचीत करते हुए चिदंबरम ने कहा, “भाजपा हिंदी या इंग्लिश नहीं पढ़ सकती. सीजेआई ने फॉर्म 6 में किसी भी मॉडिफिकेशन को मंजूरी देने से साफ इनकार किया है. उन्होंने यह एक बार कहा था और इसे कई बार ब्रॉडकास्ट किया जा रहा है.”

चिदंबरम ने कहा कि सीजेआई का बयान ओपन कोर्ट में दिया गया था और सवाल किया कि भाजपा इससे कैसे इनकार कर सकती है. उन्होंने कहा, “यह एक ओपन कोर्ट है. भाजपा इस बात से कैसे साफ इनकार कर सकती है? सीजेआई ने साफ कहा कि हम फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं देते हैं. मैंने डिक्लेरेशन देखा है. डिक्लेरेशन असल में फॉर्म 6 में एक मॉडिफिकेशन और एडिशन है. एडिशन का मतलब मॉडिफिकेशन भी होता है.”

वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी एसआईआर एक्सरसाइज की आलोचना की और इसे “अनकॉन्स्टिट्यूशनल और अल्ट्रा वायर्स” कहा. कार्ति चिदंबरम ने कहा, “यह पूरी एसआईआर एक्सरसाइज अनकॉन्स्टिट्यूशनल और अल्ट्रा वायर्स है. इलेक्शन कमीशन में फैसले या तो तीनों इलेक्शन कमिश्नरों को एकमत से या मेजॉरिटी से लेने होते हैं. ऐसा लगता है कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर एकतरफा फैसले ले रहे हैं.”

कार्ति चिदंबरम ने आरोप लगाया कि यह एक्सरसाइज वोटरों को शामिल करने के बजाय उन्हें बाहर करने के लिए डिजाइन की गई थी. उन्होंने कहा, “पूरी एसआईआर एक्सरसाइज वोटरों को शामिल करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें बाहर करने के लिए बनाई गई है. फॉर्म 6 बदल दिया गया है. फॉर्म 6 में पूछे गए सवाल अल्ट्रा वायर्स हैं.” कार्ति चिदंबरम ने एप्लिकेंट्स से यह पूछने की जरूरत पर सवाल उठाया कि क्या उनके माता-पिता वोटर थे.

कार्ति चिदंबरम ने से ​​कहा, “पूछे जा रहे सवाल यह हैं कि क्या उनके माता-पिता वोटर थे. ये सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए. आपका वोट देने का अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके माता-पिता वोटर थे या नहीं. जब तक आप भारतीय नागरिक हैं, 18 साल से ज्यादा उम्र के हैं और किसी चुनाव क्षेत्र के निवासी हैं, आपको वोट देने का अधिकार है. यह एक बुनियादी अधिकार है और इससे इनकार किया जा रहा है.”

कार्ति चिदंबरम ने फॉर्म 7 के कथित गलत इस्तेमाल पर भी चिंता जताई, जिसका इस्तेमाल उन मामलों में वोटर्स की मौत हो जाने या किसी पते से दूसरी जगह चले जाने पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जाता है.

कार्ति चिदंबरम ने कहा, “यह पॉलिटिकल एक्टिविस्ट्स द्वारा बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए नहीं है. यह बात सामने आई है कि कर्नाटक में एक घटना में भाजपा वर्कर्स ने वोटर्स को हटाने के लिए फॉर्म 7 के जरिए 7,000 आवेदन फाइल कीं. यह प्रोसेस का पूरी तरह से गलत इस्तेमाल है.”

कार्ति चिदंबरम ने कहा, “एसआईआर के नाम पर अधिकार के बाहर की गतिविधियां की गई हैं. इसीलिए हम सीईसी से इस्तीफा देने के लिए कह रहे हैं. यहां तक ​​कि अब ज्यूडिशियरी की अंतरात्मा भी जाग गई है, इसीलिए नोटिस जारी किए गए हैं. पुराने जज और मौजूदा जज चिंता जता रहे हैं. इसलिए, यह कोई Political या पार्टी का मुद्दा नहीं है बल्कि लोगों से जुड़ा मुद्दा है.”

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एसडी/पीएम

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