गंगा महासभा का बड़ा ऐलान: काशी में जुटेंगे 3000 संत, जेन-जी को मिलेगा बोलने का मंच

वाराणसी, 11 अक्टूबर . गंगा महासभा ने 3-5 नवंबर को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में संस्कृति संसद 2026 की घोषणा की है. इसमें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लगभग 3,000 संत, विद्वान और कलाकार एक साथ आएंगे. इस मंच पर जेन-जी को बोलने का मौका दिया जाएगा.

काशी विद्वत परिषद के महासचिव रामनारायण द्विवेदी ने कहा, “मनुस्मृति को लेकर एक विमर्श छिड़ा हुआ है और काशी विद्वत परिषद में इस पर दीर्घकालिक अनुशीलन चल रहा है. विलियम जोन्स द्वारा अनूदित मनुस्मृति के पूर्वापर ग्रंथों के अध्ययन के बाद कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं. इन प्रश्नों के समाधान के लिए हमें मूल पांडुलिपि का अन्वेषण और शोध करना है. इसके लिए एक अखिल भारतीय समिति के गठन पर विमर्श होगा.”

उन्होंने कहा, “इस संस्कृति संसद में इस बात पर चर्चा होगी कि समिति में किन नामों को शामिल किया जाए, जो वैश्विक स्तर पर विदेशों में मौजूद पांडुलिपियों को India और काशी में लाकर वास्तविक ग्रंथ-स्वरूप तैयार कर सकें. मनु भगवान के मूल चिंतन को समाज के सामने लाने पर विचार होगा. यह विमर्श पूज्य संतों की उपस्थिति में होगा. इसमें देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद शामिल होंगे. सभी की उपस्थिति में परामर्श के बाद जो निर्णय होगा, उसे सार्वजनिक किया जाएगा.”

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, “आगामी 2 से 5 नवंबर तक काशी में संस्कृति संसद का आयोजन होगा. इससे पूर्व 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी कार्यशाला होगी, जिसमें भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश के धार्मिक धरोहरों को सजाया जाएगा. पहली बार ऐसा हो रहा है कि धर्माचार्यों से लेकर पद्म पुरस्कारों से अलंकृत विद्वानों और चित्रकारों तक सभी इसमें भाग ले रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “इस बार हमने जेन-जी के लिए स्वतंत्र सत्र रखा है. अभी देश में जेन-जी के नाम पर युवाओं को बिठाकर बड़े-बड़े लोगों द्वारा संबोधित किया जा रहा है, लेकिन जेन-जी सिर्फ सुनना नहीं, बोलना चाहता है. उसे बोलने का मंच कौन देगा? इसी प्रयोग के तहत पहली बार काशी में तीन दिन लगातार जेन-जी को ही बोलने के लिए अलग मंच दिया जाएगा.”

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि लगभग तीन हजार संत पूरे देश से काशी पधार रहे हैं. वे तीन-चार दिनों तक काशी में रहेंगे और सनातन हिंदू धर्म को लेकर व्यापक विमर्श होगा.उन्होंने कहा कि जेन-जी के प्रतिनिधित्व का प्रयास पूरे देश से किया गया है. युवा पीढ़ी बहुत बड़ी है, अगर एक ही कॉलेज को टारगेट किया जाए तो भी हजारों की संख्या हो जाती है, लेकिन सवाल यह है कि सभागार में कितने लोगों को बैठाया जा सकता है. बड़े सभागार और छोटे सभागार में क्षमता का भी ध्यान रखना होगा. छोटे सभागार में 150 से अधिक लोग नहीं बैठ सकते, इसलिए इसमें चिन्हित युवाओं को ही शामिल किया जाएगा.

आने वाले ‘संस्कृति संसद 2026’ के बारे में, पातालपुरी मठ के जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा, “संस्कृति संसद एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो सभी को मौका देता है. अभी जेन-जी पर खास फोकस है, और उनके नाम पर संस्कृति को खत्म करने की बातें हो रही हैं. साथ ही दिल्ली में देखे गए सेमी-न्यूड डांस जैसे मामले जेन-जी को बदनाम करने के लिए हैं. यह सब लेफ्टिस्ट लोगों का एक ‘फील्डिंग’ सेटअप है ताकि युवाओं को ऐसे कामों से जोड़कर उन्हें बदनाम किया जा सके. मेरा मानना ​​है कि काशी में हो रही संस्कृति संसद पूरे मामले को पूरी तरह से साफ करेगी और सच को झूठ से अलग करेगी.”

सीजेपी विरोध प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि मैंने बार-बार कहा है कि जो किया जा रहा है वह किसी भी हालत में सही नहीं है. युवा पीढ़ी को बदनाम करने के लिए उन्हें ‘जेन-जी’ कहना मुझे लेफ्टिस्ट्स की एक बड़ी, सोची-समझी चाल लगती है. इस पूरे मामले में विपक्ष का असली चेहरा भी सामने आ गया है. विपक्ष ‘इंडिया’ अलायंस बनाने के लिए एक साथ आया था, फिर भी वे Prime Minister को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाए और लगातार चुनावी हार का सामना कर रहे हैं. इसलिए उन्होंने अराजकता फैलाने का एक नया तरीका निकाला है. उनका मकसद अराजकता फैलाकर देश में अशांति पैदा करना है.

–

केके/वीसी

Leave a Comment