कर्नाटक में सूखे पर सियासत तेज, भाजपा ने राहुल गांधी से प्रभावित इलाकों का दौरा करने का किया आग्रह

Bengaluru, 14 अक्टूबर . भाजपा नेता आर. अशोक ने Wednesday को कांग्रेस सांसद और Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से कर्नाटक के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने, फसल के नुकसान की गंभीरता का आकलन करने और किसानों को पर्याप्त और समय पर राहत सुनिश्चित करने के लिए दखल देने का आग्रह किया.

उन्होंने राज्य Government द्वारा हाल ही में प्रति किसान 2,500 रुपए की इनपुट सब्सिडी की पहली किस्त दिए जाने पर भी सवाल उठाए.

खास बात यह है कि कर्नाटक ने केंद्र से सूखे से राहत के लिए 10,000 करोड़ रुपए से 12,000 करोड़ रुपए की मांग की है, जबकि राज्य Government ने हाल ही में सूखे से प्रभावित लगभग 50 लाख किसानों में से प्रत्येक को पहली किस्त के तौर पर 2,500 रुपए जारी किए हैं.

केंद्र के नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के नियमों के तहत, किसान कुल 8,500 रुपए की राहत के हकदार हैं, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है. हालांकि, केंद्र ने अभी तक अपना हिस्सा जारी नहीं किया है, इसलिए राज्य Government ने अपने फंड से पहली किस्त के तौर पर 2,500 रुपए (प्रत्येक किसान) जारी करने का फैसला किया.

Government पहले ही 50 लाख किसानों को सहायता देने के लिए लगभग 1,250 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है. Wednesday को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लिखे एक पत्र में, अशोक ने कर्नाटक Government पर परेशान किसानों को पर्याप्त सहायता न देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि फसल के भारी नुकसान के बावजूद, चार महीने बाद भी किसानों को कोई खास राहत नहीं मिली है.

उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे राज्य Government से जवाब मांगें और उसे निर्देश दें कि वह पिछली भाजपा Government द्वारा लागू किए गए उपायों के बराबर स्तर पर राहत कार्य करे. कर्नाटक हाल के वर्षों में सूखे की सबसे गंभीर स्थितियों में से एक का सामना कर रहा है, जिसमें दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश में 35 प्रतिशत की कमी आई है. उन्होंने अपने पत्र में इसे 1971 के बाद से राज्य में दर्ज की गई सबसे खराब स्थिति बताया.

उन्होंने बताया कि राज्य Government ने 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, और लगभग 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल का अनुमानित नुकसान 46,324.50 करोड़ रुपए है. नुकसान के पैमाने ने लाखों किसान परिवारों की आजीविका, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे Government का तत्काल हस्तक्षेप जरूरी हो गया है.

पहली किस्त के तौर पर प्रति किसान 2,500 रुपए की इनपुट सब्सिडी देने के राज्य Government के फैसले पर सवाल उठाते हुए, अशोक ने कहा कि यह राशि खेती के लिए जमीन तैयार करने की बुनियादी लागत को पूरा करने के लिए भी अपर्याप्त है.

उन्होंने तर्क दिया कि फसल के नुकसान, बढ़ते कृषि कर्ज और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए, Government द्वारा घोषित मदद से उन किसानों को बहुत कम राहत मिलेगी, जिनकी पूरी फसल की कमाई चली गई है.

अशोक ने पत्र में कहा, “सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि असल और असरदार मदद की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि Government को सिर्फ घोषणाएं करने के बजाय पर्याप्त आर्थिक मदद देकर किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए.

अपनी बात के समर्थन में, अशोक ने 2019-20 और 2022-23 के बीच पिछली भाजपा Government द्वारा दी गई मदद का जिक्र किया. उनके पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, Government ने 57.43 लाख हेक्टेयर में फसल के नुकसान के लिए 51.90 लाख किसानों को कुल 6,651.15 करोड़ रुपए की इनपुट सब्सिडी दी थी.

2019 में, 9,72,517 हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ था और 6,71,314 किसानों को 1,232.20 करोड़ रुपए दिए गए थे. 2020 में, 19,68,247 हेक्टेयर जमीन पर नुकसान हुआ था और 12,00,346 किसानों को 941.70 करोड़ रुपए दिए गए थे.

अशोक ने बताया कि 2021 में, Government ने 14,93,811 हेक्टेयर जमीन पर फसल के नुकसान के लिए 18,56,083 किसानों को 2,446.10 करोड़ रुपए दिए थे. 2022 में, 13,09,421 हेक्टेयर जमीन पर नुकसान के लिए 14,62,841 किसानों को 2,031.15 करोड़ रुपए दिए गए थे.

उन्होंने पिछली Government के समय लागू राहत दरों का भी जिक्र किया और कहा कि वे राज्य Government द्वारा अभी घोषित मदद से काफी ज्यादा थीं.

पत्र के अनुसार, बारिश पर निर्भर फसलों के लिए दरें 13,600 रुपए प्रति हेक्टेयर थीं, जिसमें एसडीआरएफ/एनडीआरएफ फंड से 8,500 रुपए और राज्य के हिस्से के तौर पर 5,100 रुपए शामिल थे. सिंचित फसलों के लिए, मदद 25,000 रुपए प्रति हेक्टेयर थी, जिसमें एसडीआरएफ/एनडीआरएफ फंड से 17,000 रुपए और राज्य Government की ओर से 8,000 रुपए शामिल थे.

उन्होंने कहा कि बारहमासी फसलों के लिए दर 28,000 रुपए प्रति हेक्टेयर थी, जिसमें एसडीआरएफ/एडीआरएफ फंड से 22,500 रुपए और राज्य के हिस्से के तौर पर 4,500 रुपए शामिल थे.

उन्होंने सवाल किया कि मौजूदा Government सूखे की गंभीरता के बावजूद प्रति किसान सिर्फ 2,500 रुपए क्यों दे रही है, जबकि पिछली Government ने पहले के सूखे के दौरान काफी ज्यादा मदद दी थी.

उन्होंने Government से यह बताने को कहा कि उसने राज्य के किसानों को वैसी मदद क्यों नहीं दी?

अशोक ने सूखा प्रभावित इलाकों की पहचान करने और उन्हें घोषित करने में हुई देरी की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि किसान प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं कर सकते, जबकि उनकी फसलें सूख रही हैं और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है.

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एससीएच/एबीएम

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