
Bengaluru, 13 अक्टूबर . कर्नाटक के पूर्व Chief Minister और कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य सिद्दारमैया ने Tuesday को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए बढ़ाए गए आरक्षण को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद पूर्व भाजपा Government की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा Government ने पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना जल्दबाजी में आरक्षण बढ़ाया था.
एक बयान में सिद्दारमैया ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से उन वंचित समुदायों की उम्मीदों को झटका लगा है, जिन्हें पीढ़ियों से समान अवसर नहीं मिले. उन्होंने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि भाजपा Government ने बिना पर्याप्त तैयारी के जल्दबाजी में आरक्षण बढ़ाने का फैसला किया था.
उन्होंने कहा कि भाजपा Government को Supreme Court के इंद्रा साहनी मामले के फैसले की जानकारी थी, जिसमें कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने की बात कही गई थी. इसके बावजूद 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले एससी आरक्षण को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और एसटी आरक्षण को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया.
सिद्दारमैया ने सवाल किया, “पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा दिए बिना इतनी जल्दबाजी में आरक्षण क्यों बढ़ाया गया? क्या सामाजिक न्याय से ज्यादा भाजपा के लिए चुनावी लाभ महत्वपूर्ण था?”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस Government के कार्यकाल में गठित न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति ने आरक्षण बढ़ाने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया था. उन्होंने कहा कि बढ़े हुए आरक्षण की मांग किसी Political दल की उदारता से नहीं, बल्कि अवसरों से वंचित समुदायों के दशकों लंबे संघर्ष के कारण पूरी हुई थी.
सिद्दारमैया ने केंद्र Government की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि केंद्र ने इस मामले को अदालत में लंबित होने का हवाला देकर बढ़े हुए आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के कर्नाटक के अनुरोध को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा कि अब केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस आरक्षण को बचाने के लिए कौन-सा संवैधानिक समाधान प्रस्तावित करता है.
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों (जिन्हें कर्नाटक की राजनीति में सामूहिक रूप से ‘अहिंदा’ समूह कहा जाता है) को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है. उनके आरक्षण लाभ और सामाजिक मुख्यधारा में भागीदारी पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
सिद्दारमैया ने दोहराया कि सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना Political लोकतंत्र अधूरा है.
उन्होंने कहा, “आरक्षण कोई दान नहीं है. यह ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने और समाज के वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का एक संवैधानिक माध्यम है.”
उन्होंने केंद्र Government से आग्रह किया कि वह 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा से बंधी न रहे और आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाकर उसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करे.
सिद्दारमैया ने राज्य Government से भी मांग की कि वह बढ़े हुए आरक्षण को बरकरार रखने और अदालत के आदेश से प्रभावित होने वाले छात्रों व नौकरी के अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उचित कानूनी कदम उठाए.
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई केवल चुनावी वादों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसके लिए Political प्रतिबद्धता, संवैधानिक जिम्मेदारी और स्थायी संवैधानिक सुधारों की जरूरत है.
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल प्रतिनिधित्व का वादा करना नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व और समान अवसर सुनिश्चित करना है.”
इस बीच, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने भी Tuesday को कांग्रेस Government की आलोचना की. उन्होंने कहा कि राज्य Government एससी और एसटी के लिए बढ़ाए गए आरक्षण की रक्षा करने में नाकाम रही है.
एक बयान में विजयेंद्र ने कहा कि अनुसूचित समुदायों के हितों की रक्षा के लिए Government की कमजोर पैरवी के कारण सामाजिक न्याय के तहत उनके आरक्षण के अधिकार को झटका लगा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी भी अनुसूचित समुदायों के कल्याण के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया. उन्होंने कहा कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने का निर्णय पूर्व Chief Minister बसवराज बोम्मई की भाजपा Government ने लिया था.
विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा Government ने एससी आरक्षण में 2 प्रतिशत और एसटी आरक्षण में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, लेकिन मौजूदा कांग्रेस Government अदालत में इस बढ़े हुए आरक्षण की रक्षा नहीं कर सकी.
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कांग्रेस Government न केवल अतिरिक्त लाभ देने में विफल रही, बल्कि पहले से दिए गए आरक्षण लाभों को भी बचा नहीं सकी.
विजयेंद्र ने राज्य Government से हाई कोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाने और बढ़े हुए आरक्षण की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि Government इस मुद्दे पर लापरवाही जारी रखती है तो हम अनुसूचित समुदायों की ओर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे.”
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एएमटी/डीकेपी