एनसीबी को अंतर-राज्यीय चरस तस्करी मामले में सजा दिलाने में कामयाबी मिली

चंडीगढ़, 19 सितंबर . नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने चरस की अंतरराज्यीय तस्करी से संबंधित एक मामले में तीन आरोपियों, जोगिंदर सिंह, अनिल कुमार और राज कुमार उर्फ ​​राजू को दोषी ठहराया है.

18 दिसंबर 2018 को, एनसीबी, चंडीगढ़ की एक टीम ने Himachal Pradesh-चंडीगढ़ सीमा के पार 16.5 किलोग्राम चरस की तस्करी के प्रयास को विफल कर दिया. एनसीबी अपराध संख्या 49/2018 के तहत चंडीगढ़ के खुदा लाहोरा पुल के पास प्रतिबंधित चरस से भरी एक हुंडई वरना को रोका गया. मौके से दो व्यक्तियों, Himachal Pradesh के कुल्लू जिले के निवासी जोगिंदर सिंह और Himachal Pradesh के मंडी जिले के निवासी अनिल कुमार को गिरफ्तार किया गया.

जांच के दौरान, Himachal Pradesh के कुल्लू जिले के निवासी राज कुमार उर्फ ​​राजू की तस्करी नेटवर्क में संलिप्तता का पता चला. जांच में पता चला कि वह गिरफ्तार आरोपियों के साथ मिलकर Mumbai , गोवा, Bengaluru और चेन्नई में चरस की आपूर्ति कर रहा था. जब्त की गई 16.5 किलोग्राम चरस Mumbai ले जाई जानी थी, जहां से इसे आगे अन्य स्थानों पर वितरित किया जाना था.

राज कुमार उर्फ ​​राजू को 20 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया और Himachal Pradesh के भुंतर स्थित उसके आवास से 80 ग्राम अतिरिक्त चरस बरामद की गई.

एनसीबी ने 12 जून 2019 को चंडीगढ़ स्थित विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस न्यायालय के समक्ष नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत तीनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.

मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को अपने फैसले में जोगिंदर सिंह, अनिल कुमार और राज कुमार उर्फ ​​राजू को दोषी ठहराया. जोगिंदर सिंह और अनिल कुमार को 12 वर्ष के कठोर कारावास और 1,00,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई, जबकि राज कुमार उर्फ ​​राजू को 1 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई.

इस सफल दोषसिद्धि से पेशेवर जांच और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए एनसीबी की दृढ़ प्रतिबद्धता रेखांकित होती है. ब्यूरो मादक पदार्थों के खतरे को रोकने और नशामुक्त India के सपने को साकार करने में योगदान देने के अपने मिशन के प्रति अडिग है.

जनता से सहयोग का अनुरोध: मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना मानस – राष्ट्रीय हेल्पलाइन (टोल-फ्री: 1933) के माध्यम से दें. सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.

एमएस/

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