एजीआई और सुपरइंटेलिजेंस से देश की संप्रभुता को खतरा, भारत को बनाना होगा दुनिया का पहला एजेंटिक एआई कानून : पवन दुग्गल

New Delhi, 10 सितंबर . Supreme Court के वकील और साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने एआई के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आने वाले 2-3 साल India और पूरी दुनिया के लिए सबसे अहम होने वाले हैं, क्योंकि एआई अब इंसानी दिमाग से आगे निकलने की तैयारी में है. अगर अभी से इस पर सख्त कानून और सुरक्षा के नियम नहीं बनाए गए, तो यह तकनीक देश की सुरक्षा और लोगों के अधिकारों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

पवन दुग्गल ने कहा, “एआई हमारी सोच से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है. सैम ऑल्टमैन पहले ही बता चुके हैं कि सिंगुलैरिटी का कुछ हिस्सा हासिल हो चुका है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इंसानी इंटेलिजेंस के कुछ हिस्सों को पीछे छोड़ दिया है. इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस आ सकता है और अगले 2-3 सालों में सुपरइंटेलिजेंस आने की संभावना है, ऐसे में हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है.”

उन्होंने कहा, “एक बार एजीआई आ जाए, तो आप इससे संबंधित कोई मॉडल बना पाते हैं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. जो दांव पर लगा है और जो चुनौती है, वह एक देश के तौर पर आपकी संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता है. सुपरइंटेलिजेंस वह इंटेलिजेंस होगी जो इस रेस में पूरी मानवता की इंटेलिजेंस को पीछे छोड़ देगी. जब एलन मस्क कहते हैं कि एआई मानवता के लिए खतरा है, तो वह गलत नहीं हैं. इसलिए एआई, एजीआई और सुपरइंटेलिजेंस पर सुरक्षा आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है और India Government को इसे प्राथमिकता में रखते हुए आगे बढ़ना होगा.”

पवन दुग्गल ने कहा कि India कोई सामान्य देश नहीं है. हम न सिर्फ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, बल्कि सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भी हैं. इसलिए आज हम जो करेंगे, वह पूरी दुनिया और खासतौर पर ग्लोबल साउथ के लिए एक बेंचमार्क बनेगा. India को एआई के लिए अलग और समर्पित कानूनी नियम बनाना शुरू करना चाहिए. क्योंकि India में लोग तभी काम करते हैं, जब किसी जरूरी काम के पीछे कानून की ताकत हो. जो चीजें सिर्फ सिफारिश या स्वैच्छिक होती हैं, वे अक्सर जमीन पर नहीं उतरतीं.

पवन दुग्गल ने कहा, “दुनिया में किसी भी देश ने अब तक एजेंटिक एआई पर कानून नहीं बनाया है. सिंगापुर ने जनवरी में एजेंटिक एआई को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं, लेकिन वे सिर्फ स्वैच्छिक हैं. ऐसे में एआई को रेगुलेट करने के लिए India जो भी बेंचमार्क तय करेगा, वही ग्लोबल साउथ के लिए लागू होने वाले मानक बन सकते हैं. हम सभी ने 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के बारे में सुना है, लेकिन अब वह समय आ गया है, जब हमें यह समझना होगा कि इंसानों के एआई के खिलाफ भी अधिकार हैं, ताकि एआई को अधिक जवाबदेह बनाया जा सके.”

केके/एबीएम

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