एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत चुकाता था पूरा उत्तर प्रदेश: सीएम योगी

Lucknow, 13 सितंबर . यूपी के Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है. ठीक वैसे ही एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून व्यवस्था के भीषण संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी.

उन्‍होंने कहा कि कृत्य एक व्यक्ति गलत करता था और कीमत पूरा प्रदेश चुकाने को मजबूर होता था. आज पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है. प्रदेश के लोग कहीं भी सीना तानकर कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के हैं.

Chief Minister योगी Sunday को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्‍होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतने ही फलदायी होंगे. अच्छे लोगों का चयन नहीं होगा, चयन प्रक्रिया में विसंगति, भेदभाव और शुचिता का अभाव होगा तो उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ेगी. पिछले साढ़े नौ वर्ष में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को Governmentी नौकरी दी गई है. कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में उसके साथ भेदभाव हुआ या किसी प्रकार का लेनदेन हुआ. प्रदेश में लगभग 16 लाख Governmentी कर्मचारी हैं, जिनमें 9.5 लाख वर्तमान Government के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं. यह युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है.

सीएम योगी ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया. इनमें 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हाल, रेडिएशन आंकोलाजी विभाग में 4डी-सीटी सिम्युलेटर, पेट-सीटी मशीन, स्पेक्ट-सीटी मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआइ तथा पीएमआर विभाग में नेविगेटेड आरटीएमएस मशीन शामिल हैं.

Chief Minister योगी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी. बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी जल्द शुरू होने जा रही है. संस्थान रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआइ आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है. प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आइसीयू का संचालन किया जा रहा है.

सीएम ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निश्शुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है. आयुष्मान भारत, Chief Minister जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा और Chief Minister राहत कोष के माध्यम से जरूरतमंदों के उपचार के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है. आज समस्या पैसे की नहीं है. सबसे बड़ी चुनौती किडनी ट्रांसप्लांट सहित गंभीर उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करने की है.

उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2017 में यह प्रश्न था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान बनाया जाएगा. Government ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया. कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ परिसर आज 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है. पहले यहां की शिकायतों से समाचार पत्र रंगे रहते थे, अब शिकायतें कम आती हैं. जनता की संतुष्टि ही किसी संस्थान की सफलता की कसौटी है. संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी प्रस्तावित है.

Chief Minister योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में Governmentी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे, आज 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं. एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक और पीजी की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं. पहले केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, अब 26 बन चुके हैं और 33 निर्माणाधीन हैं. Governmentी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है.

पूर्ववर्ती Government पर निशाना साधते हुए Chief Minister योगी ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स स्वीकृत किया था, लेकिन तत्कालीन Government ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया. गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई गई जिस पर Supreme Court का स्थगन था. वर्ष 2017 में Government बनने के बाद नई भूमि उपलब्ध कराई गई और आज गोरखपुर एम्स सफलतापूर्वक संचालित है. रायबरेली एम्स की समस्याओं का भी समाधान किया गया.

Chief Minister योगी ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि हमारे ही डाटा पर पश्चिमी देश शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं, जबकि हम अपने डाटा को संरक्षित नहीं कर पाते. अपने मेडिकल डाटा को संरक्षित कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी होंगी. आइआइटी Kanpur के साथ मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआइ में सेंटर आफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं. एआइ भी चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है.

उन्‍होंने कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में विकसित कर ली थी, लेकिन उसे India आने में 100 वर्ष लग गए. वहीं कोविड महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने Prime Minister Narendra Modi के मार्गदर्शन में केवल नौ महीने में दो वैक्सीन विकसित कर दीं. India ने अपने नागरिकों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराने के साथ करीब 100 मित्र देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई.

Chief Minister योगी ने कहा कि बीमारी का पैटर्न बदल रहा है, इसलिए चिकित्सा संस्थानों को समय से 10 कदम आगे सोचने की जरूरत है. हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी एक साथ चलेंगी तभी कोई संस्थान वास्तविक सेंटर आफ एक्सीलेंस बन सकेगा.

उप Chief Minister ब्रजेश पाठक ने कहा कि छह वर्ष में लोहिया संस्थान ने तेजी से प्रगति की है. यहां हो रहे शोध को देखकर विश्वास है कि भविष्य में संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार भी आ सकता है. उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि नंबर के साथ कौशल भी जरूरी है और चिकित्सक संकल्प लें कि कोई मरीज निराश होकर न लौटे.

पूर्ववर्ती Government पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2017 से पहले व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव था. आज Chief Minister योगी के नेतृत्व में बिना भेदभाव स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और प्रदेश में पहले करीब पांच हजार की तुलना में अब साढ़े 12 हजार से अधिक डॉक्टर तैयार हो रहे हैं.

चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि एक समय यह अस्पताल केवल 20 बेड से शुरू हुआ था. वर्ष 2017 में Chief Minister योगी के नेतृत्व में Government बनने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र ने लंबी छलांग लगाई है. छह वर्ष पहले Chief Minister योगी ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया और उसके बाद जिस तेजी से इसकी प्रगति हुई है, वह सराहनीय है. आज संस्थान में 1,400 बेड संचालित हो रहे हैं और यह प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बना चुका है.

विकेटी/एएसएच

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