
New Delhi, 26 अगस्त . केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने Wednesday को कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी और वैश्विक परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सामूहिक क्षमता निर्माण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण को केवल व्यक्तिगत कौशल विकास तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे पूरे समाज और विभिन्न संस्थानों की साझी जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना होगा.
क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) विषय पर आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी और सामाजिक बदलाव की गति अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुकी है. ऐसे समय में निरंतर सीखना और स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालना अनिवार्य हो गया है.
उन्होंने कहा कि आज जो ज्ञान या कौशल सीखा जाता है, वह बहुत कम समय में पुराना पड़ सकता है. इसलिए व्यक्तियों और संस्थानों दोनों को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे वे लगातार सीखते रहें और नई परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर सकें.
डॉ. सिंह ने कहा कि संस्थानों को भी अलग-अलग दायरों में काम करने के बजाय एकीकृत तरीके से कार्य करना सीखना होगा. विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग से नई चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सकता है तथा नीतियों को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि India को ऐसे दृष्टिकोण की ओर बढ़ना चाहिए जिसमें संस्थागत समन्वय के साथ-साथ “सम्पूर्ण समाज की भागीदारी” को भी महत्व दिया जाए. उन्होंने कहा कि केवल Governmentी प्रयासों के भरोसे सभी चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है.
मंत्री ने आगे कहा कि Government से हर समस्या का समाधान करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती और इसके लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र जैसे विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है.
डॉ. सिंह ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि India ने हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों को अधिक खुला और सहभागी बनाया है. अब आवश्यकता इस बात की है कि विभिन्न क्षेत्र एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करें और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करें.
उन्होंने शासन प्रणाली में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि अधिकारियों को केवल नियम पुस्तिका तक सीमित सोच से आगे बढ़ना चाहिए और जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय समाधान केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए उचित स्तर का व्यावहारिक दृष्टिकोण आवश्यक है और इसके लिए मानसिकता में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्षमता निर्माण में डिजिटल और निरंतर सीखने वाले मंचों की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि आईगॉट मंच पर वर्तमान में 40 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जिसे Governmentी अधिकारियों के लिए एक सतत शिक्षण मंच के रूप में विकसित किया गया है. यह उन्हें नई नीतियों, तकनीकों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से लगातार अपडेट रहने का अवसर प्रदान करता है.
उन्होंने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान का भी उल्लेख किया और कहा कि ये संस्थान देश में सुशासन और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाले व्यापक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
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डीबीपी