आत्मसमर्पण के बाद बदली नक्सली कमांडर की जिंदगी, पीएम आवास से मिला पक्का मकान

बलरामपुर, 5 अक्टूबर . कभी Naxalite कमांडर रहे सीताराम सोनवानी की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है. साल 2021 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे सीताराम अब अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं. Government की पुनर्वास योजना के तहत उन्हें Prime Minister आवास योजना का पक्का मकान मिला है. जंगल और हिंसा की जिंदगी से निकलकर अब उनका ध्यान परिवार, घर और बच्चों के भविष्य पर है.

सीताराम ने बताया कि Naxalite संगठन छोड़ने का फैसला लेने में उनकी पत्नी की अहम भूमिका रही. उनकी पत्नी बिराजो ने उन्हें Naxalite गतिविधियां छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए समझाया. इसके बाद दोनों ने सामान्य जीवन में लौटने का फैसला किया. सीताराम ने बताया कि वह वर्ष 1998 में Naxalite संगठन में शामिल हुए थे और 2005 में उत्तर सरगुजा क्षेत्र में कमांडर के पद पर थे. बाद में उनका क्षेत्र लुंड्रा हो गया. इसी दौरान उनकी पत्नी से मुलाकात और बातचीत हुई. पत्नी ने उन्हें Naxalite गतिविधियां छोड़ने के लिए समझाया और कहा कि उनके नाम से लोग डरते हैं, इसलिए उन्हें यह रास्ता छोड़ देना चाहिए.

सीताराम ने बताया कि इसके बाद उन्होंने संगठन छोड़ने का मन बनाया और परिवार के साथ असम चले गए. उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास संगठन का पैसा था, लेकिन वह उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे. परिवार की मदद से उन्होंने बाहर रहकर जीवन शुरू किया. बाद में उन्हें Government की नक्सल पुनर्वास नीति के बारे में जानकारी मिली. सीताराम ने बताया कि उन्हें लगा कि Government के सामने आत्मसमर्पण करने से एक ओर वह पूरी तरह मुख्यधारा में लौट सकेंगे और दूसरी ओर Government की पुनर्वास योजना का लाभ भी मिल सकेगा.

सीताराम ने बताया कि 26 फरवरी 2021 को बलरामपुर जिले में रामकृष्ण साहू के समक्ष उन्होंने आत्मसमर्पण किया. आत्मसमर्पण के बाद उन्हें जेल भेजा गया, जहां वह करीब 14 महीने रहे. उन्होंने बताया कि दो मामलों में वह जेल में रहते हुए बरी हुए, जबकि तीन मामलों में जमानत मिलने के बाद बाहर आए. इसके बाद उन्हें पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाले लाभ मिलने शुरू हुए. इसी योजना के तहत अब उनका Prime Minister आवास योजना का पक्का मकान तैयार हो चुका है.

नए घर को लेकर सीताराम ने Prime Minister Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश के Chief Minister विष्णु देव साय का आभार जताया. उन्होंने बलरामपुर के पूर्व एसपी लाल उमेद सिंह को भी धन्यवाद दिया. उनके बेटे की पढ़ाई में मदद की गई और उनकी पत्नी को भी 10वीं की पढ़ाई पूरी करने में सहयोग मिला.

वहीं, सीताराम की पत्नी बिराजो ने कहा कि उनके पति पहले Naxalite थे और उन्होंने ही उन्हें यह रास्ता छोड़ने के लिए समझाया था. उन्होंने बताया कि परिवार करीब 16 साल तक बाहर रहा और गांव लौटने के बाद सीताराम को जेल में रहना पड़ा. अब Government की ओर से पक्का मकान मिलने के बाद परिवार इसी घर में रह रहा है. बिराजो ने बच्चों की पढ़ाई में मिली मदद के लिए भी Government और पूर्व एसपी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि उन्हें फॉर्म भरवाने में मदद मिली और उन्होंने 10वीं की पढ़ाई पूरी की.

बलरामपुर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के मुताबिक, मुख्यधारा में लौटे लोगों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को Governmentी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष पहल की जा रही है. इस योजना के तहत जिले में कुल 27 मकान स्वीकृत किए गए हैं. इनमें 18 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 9 मकानों का निर्माण जारी है.

सीताराम को जंगल की जमीन का पट्टा मिलने की भी उम्मीद है. उन्होंने बताया कि जमीन से जुड़े दस्तावेज जमा हो चुके हैं और उन्हें भरोसा है कि Government जल्द ही पट्टा उपलब्ध कराएगी. सीताराम का कहना है कि आत्मसमर्पण किए हुए करीब पांच साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें जमीन से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास अपनी जमीन नहीं है और जिस जमीन पर उनका परिवार रह रहा है, वह जंगल की जमीन है. वन विभाग की ओर से नक्शे से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज जनपद में जमा किए जा चुके हैं. अब उन्हें Government से पट्टा मिलने की उम्मीद है. सीताराम ने Government से जल्द पट्टा देने का आग्रह किया है.

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पीएसके

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