
Bengaluru, 30 सितंबर . कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने Wednesday को आरोप लगाया कि आठ Governmentी विभागों में लगभग 38,000 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है. संघ ने चेतावनी दी कि अगर नवंबर तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे कमीशन के तौर पर ली गई रिश्वत से जुड़े दस्तावेज जारी करेंगे. संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके फंड का इस्तेमाल कांग्रेस Government की गारंटी योजनाओं के लिए किया गया है.
एसोसिएशन ने यह भी दावा किया है कि जिन ठेकेदारों ने कमीशन दिया, उनके बिलों के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ ने आरोप लगाया कि पिछली Government की तुलना में ठेकेदारों से मांगे जाने वाले कमीशन में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने दावा किया कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान का इस्तेमाल राज्य Government की गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है.
मंजूनाथ ने कहा कि Chief Minister डीके शिवकुमार ने पहले ठेकेदारों को भरोसा दिलाया था कि उनके बकाया बिल 30 जून तक चुका दिए जाएंगे लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि Government अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही.
उन्होंने ठेकेदारों की चिंताओं को संभालने के तरीके को लेकर कांग्रेस Government की आलोचना भी की. उन्होंने पिछली भाजपा Government के खिलाफ 40 प्रतिशत कमीशन के आरोपों को लेकर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केम्पाना के नेतृत्व में हुए आंदोलन का भी जिक्र किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस Government के सत्ता में आने के बाद भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका.अध्यक्ष ने कहा कि शिवकुमार और पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने आंदोलन के दौरान ठेकेदारों से मुलाकात की थी और भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस Government के सत्ता में आने के बाद सभी बकाया भुगतान कर दिए जाएंगे.
मंजूनाथ ने Government से आग्रह किया कि ठेकेदारों के बिलों के लिए तय फंड का इस्तेमाल गारंटी योजनाओं के लिए न किया जाए. उन्होंने कहा कि गारंटी योजनाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. Government को दूसरे स्रोतों से फंड का इंतजाम करना चाहिए और हमारा पैसा जारी करना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर Government नवंबर तक बकाया भुगतान जारी नहीं करती है, तो एसोसिएशन कथित कमीशन भुगतान से जुड़े दस्तावेज जारी करेगी.
एसोसिएशन ने जिला स्तर पर अपने आंदोलन को तेज करने की योजना की भी घोषणा की. मंजूनाथ ने कहा कि अगर शिवकुमार उनके साथ बैठक नहीं बुलाते हैं, तो ठेकेदार डिप्टी कमिश्नर के कार्यालयों तक पदयात्रा करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे. एक और मुद्दा उठाते हुए मंजूनाथ ने कर्नाटक वन विभाग द्वारा 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत काम सौंपने की प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया.
उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों करोड़ रुपए के काम अधिकारियों को सौंपे गए थे और कहा कि एसोसिएशन के पास पिछले चार वर्षों में इस प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं.
उन्होंने कहा कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने हाल ही में इस प्रथा को रोक दिया था और बताया कि 13बी और 13सी प्रावधानों में टेंडर के जरिए काम देने के बजाय सीधे काम सौंपने की व्यवस्था थी.
मंजूनाथ ने कहा कि जब टेंडर निकाले जाते थे, तो अक्सर कॉन्ट्रैक्टरों को यह पता नहीं होता था कि फंड मंजूर हुआ है या नहीं. साथ ही, उन्होंने दावा किया कि अगर स्थानीय कॉन्ट्रैक्टर इसमें हिस्सा नहीं लेते, तो दूसरे राज्यों के ज्यादा मजबूत आर्थिक स्थिति वाले कॉन्ट्रैक्टर ये काम हासिल कर सकते थे.
उन्होंने दावा किया कि पेमेंट में देरी की वजह से पिछले चार-पांच सालों से लगभग 1.5 लाख कॉन्ट्रैक्टर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.
मंजूनाथ ने कहा कि पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली कॉन्ट्रैक्टरों के मददगार रहे हैं और पीडब्ल्यूडी उन्हें कुछ राहत दे रहा है. उन्होंने कहा कि मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा भी एसोसिएशन का सहयोग कर रहे हैं.
कॉन्ट्रैक्टरों की एसोसिएशन बकाया बिलों को लेकर कांग्रेस Government के साथ लंबे समय से विवाद में उलझी हुई है.
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डीकेएम/पीएम