अक्टूबर में होने वाली एमपीसी बैठक से पहले आरबीआई गवर्नर ने वित्त मंत्री सीतारमण से की मुलाकात, महंगाई और ब्याज दरों पर बढ़ी चर्चा

New Delhi, 14 सितंबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने Monday को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब महंगाई के आउटलुक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मौद्रिक नीति की आगामी दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

वित्त मंत्री कार्यालय ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा, “आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात की.”

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब India ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है, जबकि वैश्विक आर्थिक माहौल अब भी अनिश्चित बना हुआ है.

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी), जो नीतिगत ब्याज दर तय करती है, की अगली बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली है. अगस्त में हुई पिछली बैठक में केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी बार रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था.

हालांकि, अक्टूबर की नीति समीक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-Political तनाव हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के आर्थिक शोध विभाग द्वारा तैयार एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि एक महीने पहले की तुलना में अब ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में तर्क काफी मजबूत हो गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता का आकलन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित फैसलों से अलग है. इसमें कहा गया है कि भू-Political अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे India के महंगाई परिदृश्य के लिए नए जोखिम पैदा हुए हैं.

एसबीआई इकोरैप का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई और वस्तुओं की कीमतों के बदलते माहौल ने मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया है. एक महीने पहले तक जहां लंबे समय तक नीतिगत स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है.

ऐसे में आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाजार, उद्योग जगत और निवेशकों की विशेष नजर रहेगी. सभी की रुचि इस बात में होगी कि केंद्रीय बैंक रेपो दर को लंबे समय तक स्थिर रखने की अपनी रणनीति जारी रखता है या बढ़ते महंगाई दबावों को देखते हुए सख्त मौद्रिक नीति की ओर कदम बढ़ाता है.

डीबीपी

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