पश्चिम बंगाल : कूचबिहार के एक्टिविस्ट नागेंद्र रे विवादों में घिरे, नेताजी पर विवादित बयान के बाद मांगी माफी

New Delhi, 14 अगस्त . नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में गलत बयान देने के बाद जो विवाद हुआ था, उसे शांत करने के लिए नागेंद्र रे ने माफी मांगी है. उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि अगर नेताजी जैसे राष्ट्रीय नायक के बारे में उनके ‘बिना सोचे-समझे कहे गए’ शब्दों से किसी की भावना को ठेस पहुंची है, तो उन्हें खेद है.

उनके बयानों, जो संदिग्ध और नकली दस्तावेजों पर आधारित थे, के बाद हुई तीखी प्रतिक्रिया को शांत करने की कोशिश में ही भाजपा के राज्यसभा सांसद ने social media पर अपना बयान जारी किया.

रे ने हाल ही में दावा किया था कि India की आजादी की लड़ाई में नेताजी की कोई भूमिका नहीं थी, और उन्होंने बोस पर आजाद हिंद फौज के गलत इस्तेमाल का आरोप भी लगाया था.

Thursday को पश्चिम बंगाल Government ने उन्हें इस साल फरवरी में पिछली तृणमूल Government द्वारा दिए गए ‘बंग विभूषण’ सम्मान को वापस ले लिया और रद्द कर दिया.

‘बंग विभूषण’ राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. इसे 2011 में पद संभालने के तुरंत बाद तत्कालीन Chief Minister ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के लिए बेहतरीन काम या योगदान को मान्यता देने के मकसद से शुरू किया था.

इस बीच, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कूच बिहार जिला Police ने ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ के एक समर्थक की शिकायत पर 68 वर्षीय BJP MP के खिलाफ First Information Report दर्ज की है और मामले की जांच शुरू कर दी है.

कुछ लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की वजह से उन्हें ‘अफसोस’ जताने वाला बयान जारी करना पड़ा होगा. हालांकि, उन्हें विवादित बयान देने की आदत है, जो ज्यादातर उनकी अपनी बेबुनियाद धारणाओं या संदिग्ध जानकारियों पर आधारित होते हैं.

नेताजी वाले बयान से पहले भी, उन्होंने दावा किया था कि उनके ‘महाराज’ दर्जे की वजह से उन्हें ‘राज्यसभा’ में सीट मिली है. यह बात उन्होंने संसद के हाल ही में खत्म हुए शीतकालीन सत्र के दौरान एक पत्रकार से कही थी, जिसने उन्हें याद दिलाया था कि लोकतंत्र के मंदिर में शाही दर्जे का दावा करना ठीक नहीं लगता.

संसदीय लोकतंत्र के 75 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी, उनका मानना ​​है कि संसद का उच्च सदन ‘राजाओं और सामंतों’ के लिए है.

‘ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन’ (जीसीपीए) के एक गुट के नेता होने के नाते, रे का उत्तरी बंगाल में राजबोंगशी समुदाय के एक हिस्से में काफी प्रभाव है. उनका संगठन ‘ग्रेटर कूच बिहार’ नाम से एक अलग राज्य की मांग करने वाले संगठनों में शामिल है. इस प्रस्तावित राज्य में उत्तरी बंगाल के सात जिले, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद, के साथ-साथ असम के कोकराझार, बोंगाईगांव और धुबरी जिले भी शामिल हैं.

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एससीएच/एबीएम

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