
New Delhi, 1 मई . पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया को लेकर Political तकरार और तेज हो गई है. अलग-अलग दलों के नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा, वोटर वेरिफिकेशन के तरीकों और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए. दूसरी तरफ, कोलकाता में ईवीएम रखे जाने वाले स्ट्रॉन्गरूम के बाहर भी तनाव बढ़ गया.
जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद पर अपनी राय रखते हुए ईवीएम को लेकर जताई जा रही चिंताओं और मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) को लेकर चल रही बहस के बीच अंतर स्पष्ट किया.
पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे चुनाव से पहले के चरण में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोपों से सहमत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदान के बाद ईवीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करना Political दलों की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा कहा है कि मुझे ईवीएम में चुनाव से पहले की धांधली पर विश्वास नहीं है, लेकिन चुनाव के बाद के चरण में ईवीएम की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है. हम तब भी ऐसा ही करते थे, जब मतपेटियों का इस्तेमाल होता था. पश्चिम बंगाल की Chief Minister ममता बनर्जी जैसे नेताओं को स्ट्रॉन्गरूम के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं को तैनात करने का पूरा अधिकार है.
हालांकि, अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि मौजूदा चिंता अलग है. आज चोरी ईवीएम के जरिए नहीं हो रही है. दुर्भाग्य से अब यह एसआईआर के जरिए चुनाव आयोग के माध्यम से की जा रही है. इसीलिए बंगाल का यह चुनाव सबके लिए इतनी बड़ी चुनौती बन गया है.
दिन भर के घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री (उत्तर प्रदेश) बीएल वर्मा ने सीएम ममता की आलोचना की और उन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि स्थापित चुनावी प्रक्रियाओं के तहत, उम्मीदवारों की अनुपस्थिति में भी जांच या सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
वर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि बनर्जी चुनाव निकाय के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग जानकारी प्रकाशित करता है, तो यह प्रक्रिया तब भी शुरू हो सकती है, भले ही केवल दो उम्मीदवार ही मौजूद हों. वहां कैमरे लगे होते हैं और हर चीज की पुष्टि की जा सकती है.
उन्होंने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाइयां राज्य में कानून-व्यवस्था के बिगड़ने को दर्शाती हैं, और यह संकेत देती हैं कि तृणमूल कांग्रेस Government को जनता के बढ़ते असंतोष का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि Chief Minister के तौर पर यह उनका आखिरी कार्यकाल हो सकता है.
केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बंगाल Government पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि राज्य के लोगों ने Prime Minister Narendra Modi पर अपना भरोसा जताया है और वे Political बदलाव की ओर अग्रसर हैं.
राय ने कहा कि हिंसा, गुंडागर्दी और बलात्कार जैसी घटनाएं टीएमसी Government की पहचान बन गई हैं. लोगों ने भाजपा Government को चुनने और Prime Minister मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने का फैसला कर लिया है. साथ ही, सीमा सुरक्षा के मामलों में राज्य Government की ओर से सहयोग की कमी का आरोप भी लगाया.
इस बीच, सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने तृणमूल और भाजपा, दोनों की आलोचना करते हुए बंगाल की स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए नुकसानदायक बताया. कोलकाता में एक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर कथित हंगामे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतंत्र के लिए एक गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है.
करत ने तृणमूल पर चुनावों के दौरान विपक्ष के लिए जगह खत्म करने का आरोप लगाया और साथ ही यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने वोटर लिस्ट में हेरफेर किया है और केंद्रीय बलों को पक्षपातपूर्ण तरीके से तैनात किया है. उन्होंने कहा कि बंगाल इन दोनों के बीच फंसा हुआ है, जो इसे एक फुटबॉल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
आरोपों-प्रत्यारोपों का यह दौर पश्चिम बंगाल में चल रही उस बेहद अहम Political लड़ाई को रेखांकित करता है, जिसमें नतीजों से पहले चुनावी पारदर्शिता, संस्थागत निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं.
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पीएसके