वाइब्रेंट विलेज योजना-2 से बदलेगी सरहदी गांवों की तस्वीर, जैसलमेर के 30 गांवों में सड़क, बिजली और रोजगार सुविधाओं का होगा विस्तार

जैसलमेर, 3 जून . सीमावर्ती जिले जैसलमेर के सरहदी गांवों की सुरत अब बदलने जा रही है. केंद्र Government के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित वाइब्रेंट विलेज योजना-2 के तहत भारत-Pakistan अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 30 गांवों में विकास कार्यों को मंजूरी मिल गई है.

योजना के तहत सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, 4जी मोबाइल नेटवर्क, टेलीविजन कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएंगे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा.

जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि India Government के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, पलायन रोकना और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है. इसके लिए कुल 184 गांवों का चिह्नित किया गया है, जिनमें से जैसलमेर जिले में 30 के करीब गांवो को चिह्नित किया गया है. अब इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में 90 लाख रुपए की लागत से स्मार्ट क्लास, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे, जिससे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

उन्होंने बताया कि जिले के सम, मोहनगढ़ और नाचना ब्लॉक के कुल 30 गांव इस योजना में शामिल हैं, जिसमें से सम ब्लॉक से सर्वाधिक 26 गांव किशनगढ़, तेजपाला, तनोट, साधेवाला, रतड़ाऊ, बछिया छोर, लिलोई, पीराऊ, गणेशिया, हरनाऊ, धनाना, मीठराऊ खारा, म्याजलार, लुनार, गुंजनगढ़, पोछीना, बड्डा, घोटारू, लोंगेवाला, कोलूतला, गमनेवाला, मुकने का तला, गजुओं की बस्ती, केरला, करड़ा, और बींजराज का तला इस योजना में शामिल किए हैं.है. इसके अलावा नाचना ब्लॉक के भारेवाला गांव और मोहनगढ़ ब्लॉक के शास्त्रीनगर, बाहला तथा भूटोवाला गांवों को भी योजना में शामिल किया गया है. इन सभी गांवों के लिए अलग-अलग विलेज एक्शन प्लान तैयार किए जाएंगे तथा सीमा सुरक्षा बल की स्थानीय इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को प्रगति दी जाएगी.

अनुपमा जोरवाल ने बताया कि हाल ही में बीकानेर दौरे के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुलाकात कर सीमावर्ती गांवों के विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे. विशेष रूप से मोबाइल नेटवर्क और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि सीमा पर बसे लोग अपने गांवों में रहकर ही बेहतर जीवनयापन कर सकें और देश की सुरक्षा में भी अपनी भूमिका निभाते रहें.

उनका मानना है कि वाइब्रेंट विलेज योजना के सही ढंग से अमल करने ये यह सरहदी गांव केवल सीमा क्षेत्र की पहचान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विकास, पर्यटन और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बनकर उभरेंगे. बेहतर सुविधाओं के साथ इन गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान होगा और सीमावर्ती क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को सकेंगे.

डीकेपी/

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