राम मंदिर चंदा प्रकरण : वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार बोले- तुरंत दर्ज हो एफआईआर, दोषियों को जल्द मिले सजा

New Delhi, 25 जून . अयोध्या राम मंदिर चंदा प्रकरण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने कड़ा रुख अपनाया है. वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने से कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन का किसी भी तरह से दुरुपयोग या गबन होना हिंदू समाज की आस्था पर सीधा आघात है.

उन्होंने मामले में तत्काल First Information Report दर्ज कर निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की. आलोक कुमार ने कहा कि यह पूरा मामला बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ लोगों द्वारा धन के गबन की बात सामने आई है. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि अब और इंतजार करने की जरूरत नहीं है और तुरंत First Information Report दर्ज की जानी चाहिए.

उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही First Information Report दर्ज होगी और Police इस मामले की गंभीरता से जांच करेगी. वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच होनी चाहिए और उन्हें आवश्यक तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहयोग भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

आलोक कुमार ने मांग की कि जांच जल्द पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जाए और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना आधार पर हो. यदि अगले चार से पांच महीनों के भीतर सभी दोषियों को सजा मिल जाती है और उन्हें जेल भेज दिया जाता है, तो हिंदू समाज को संतोष मिलेगा.

ट्रस्टियों को भी First Information Report में शामिल किए जाने के सवाल पर आलोक कुमार ने सीधे तौर पर किसी का नाम लेने से बचते हुए कहा कि पूरे तंत्र का पेशेवर तरीके से संचालन होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले लोगों को व्यवस्था से जोड़ा जाए और स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) बनाई जाएं. साथ ही ऐसी मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए कि भविष्य में कोई भी रामजी की संपत्ति पर गलत नजर न डाल सके. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ट्रस्ट इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगा.

राम मंदिर मुद्दे पर राजनीति को लेकर भी वीएचपी अध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विपक्ष 2027 के चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीति कर रहा है. आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि जिन दलों ने राम मंदिर निर्माण में सबसे ज्यादा बाधाएं खड़ी कीं, कारसेवकों पर गोली चलवाई और उनके बलिदान के लिए आज तक माफी नहीं मांगी, वे अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग Supreme Court तक गए और भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया. स्वतंत्रता के बाद राम मंदिर का संघर्ष न तो अंग्रेजों के खिलाफ था और न ही मुसलमानों के खिलाफ, बल्कि कांग्रेस और Samajwadi Party की नीतियों के खिलाफ था. उन्होंने दावा किया कि आज जनता सब समझ रही है और हिंदू समाज इस मुद्दे का Political लाभ लेने वालों को कभी माफ नहीं करेगा.

वहीं, मामले में ट्रस्ट के कुछ प्रमुख नामों को लेकर पूछे गए सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि अभी जांच शुरू भी नहीं हुई है और First Information Report भी दर्ज नहीं हुई है. इसलिए सभी आरोपितों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वह चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और उन्हें समर्पित तथा भावनात्मक व्यक्ति मानते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या नहीं, यह फैसला उन्हें स्वयं करना है. उन्होंने कहा कि Police पर किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए और यदि जांच ईमानदारी से होगी तो सच्चाई निश्चित रूप से सामने आ जाएगी.

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वीकेयू/पीएम

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