यूएसआईबीसी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को बताया ‘गेम चेंजर’

वॉशिंगटन, 3 फरवरी . अमेरिका-India व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “बेहद अहम” करार देते हुए कहा है कि यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नया आकार दे सकता है. यूएसआईबीसी के अध्यक्ष अतुल केशप ने Tuesday को यह बात कही.

को दिए एक साक्षात्कार में केशप ने कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिका की ओर से India से आने वाले सामान पर लगाए जाने वाले शुल्क (टैरिफ) में “काफी बड़ी कटौती” की जाएगी. उन्होंने कहा कि अब तक सार्वजनिक हुई जानकारी के अनुसार India भी इसके बदले अपने टैरिफ में “पारस्परिक रूप से” कमी करेगा.

केशप के मुताबिक, यह समझौता कई स्तरों पर सकारात्मक संकेत देता है. उन्होंने कहा, “मनोवैज्ञानिक तौर पर यह दोनों देशों के बीच रिश्तों की गति के लिए बेहद अच्छा और सकारात्मक है.” साथ ही यह “दोनों पक्षों के कारोबारियों और निवेशकों के लिए भी काफी फायदेमंद” साबित होगा.

उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते की घोषणा के बाद अमेरिकी कारोबारी जगत में माहौल “काफी सकारात्मक” है.

केशप ने कहा कि इस समझौते पर लगभग एक साल तक बातचीत चली, जिसकी शुरुआत फरवरी 2025 में Prime Minister Narendra Modi की व्हाइट हाउस यात्रा के बाद हुई थी. उस दौरान दोनों देशों ने संयुक्त बयान में व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्धता जताई थी. उन्होंने कहा, “यह एक लंबी बातचीत रही है,” और दोनों पक्षों की “सतर्कता और मेहनत” की सराहना की.

उन्होंने कहा कि यह समझौता इस बात का “मजबूत संकेत” है कि अमेरिका और India आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी रूप से और अधिक नजदीक आने को लेकर गंभीर हैं. केशप के अनुसार, व्यापार वार्ताओं के दौरान अन्य सहयोगी क्षेत्रों की प्रगति धीमी हो जाती है, लेकिन अब यह समझौता “अमेरिका-India संबंधों के अन्य पहलुओं को भी फिर से तेजी से आगे बढ़ने का रास्ता खोलता है.”

व्यापार जगत के लिए यह समझौता नई ऊर्जा लेकर आएगा. केशप ने कहा कि यह “निवेश और आपसी सहभागिता को और आगे बढ़ाने के लिए लगभग स्टार्टिंग पिस्टल जैसा” काम करेगा.

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल हैं, से मुलाकात के लिए वॉशिंगटन पहुंचे हैं. इस दौरान एक अहम खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) शिखर सम्मेलन भी प्रस्तावित है, जिसे केशप ने भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा, “क्रिटिकल मिनरल्स दुनिया के भविष्य को ऊर्जा देने के लिए बेहद जरूरी हैं.” उन्होंने ऊर्जा आवश्यकताओं, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत तकनीकों का जिक्र किया. साथ ही “परमाणु ऊर्जा के पुनर्जागरण” और रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन व सह-विकास को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया.

केशप ने कहा कि बातचीत के दौरान भी व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी जारी रही. उन्होंने India में अमेरिकी तकनीकी कंपनियों द्वारा किए गए बड़े निवेशों का हवाला देते हुए कहा कि यह India की विकास क्षमता, स्थिरता और प्रतिभा पर भरोसे को दर्शाता है. उन्होंने कहा, “अब व्यापार सुगमता बढ़ने से दोनों देशों के बीच और अधिक व्यापार होगा, जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिलेगा.”

उन्होंने बताया कि India ने पिछले वर्ष अमेरिका से “लगभग 100 अरब डॉलर के उत्पाद” खरीदे. कम टैरिफ और अधिक स्पष्टता से कंपनियों को बेहतर योजना बनाने और व्यापार विस्तार में मदद मिलेगी.

President ट्रंप के उस बयान पर सवाल के जवाब में, जिसमें उन्होंने कहा था कि India 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने को तैयार है, केशप ने कहा कि इससे कई क्षेत्रों को लाभ हो सकता है. उन्होंने कृषि, रक्षा उपकरण, पूंजीगत मशीनरी और एयरोस्पेस क्षेत्रों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, “अमेरिका भी India की तरह एक विविध अर्थव्यवस्था है,” और नए टैरिफ स्थायित्व से ऐसे क्षेत्रों में भी अवसर खुल सकते हैं, जिनके बारे में अभी तक सोचा भी नहीं गया.

केशप ने कहा कि वह लंबे समय से वार्षिक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य का समर्थन करते रहे हैं. उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यापार “करीब 200 अरब डॉलर” के आसपास है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और भी करीब आ रहे हैं,” जो वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए अच्छा होगा.

अतुल केशप ने इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए President ट्रंप, Prime Minister मोदी, दोनों देशों के राजदूतों और व्यापार वार्ताकारों को बधाई दी. उन्होंने अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष सुज़ैन क्लार्क के हवाले से कहा, “अब वक्त आ गया है कि कारोबारी समुदाय इस दृष्टि को लागू करने में अपनी भूमिका निभाए.”

गौरतलब है कि यूएस-इंडिया बिज़नेस काउंसिल अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स का हिस्सा है और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार व निवेश से जुड़े उद्योगों का प्रतिनिधित्व करती है. हाल के वर्षों में रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं.

डीएससी

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