
New Delhi, 29 अप्रैल . एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan की कोशिशें, किसी तरह अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खत्म हो जाए, सिर्फ Political रणनीति नहीं हैं, बल्कि इसकी एक बड़ी आर्थिक जरूरत भी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर Pakistan इस मामले में सफलतापूर्वक बीच-बचाव कर पाता है तो तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का खतरा कम हो सकता है, बिजली सेक्टर पर दबाव घटेगा, खाड़ी देशों के साथ रिश्ते स्थिर रहेंगे और ईरान के साथ व्यापार के नए मौके खुल सकते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan एक ऐसा देश है जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है, खासकर खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्तों पर. साथ ही वह अभी भी आईएमएफ के बेलआउट प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है.
Pakistan ने यह मध्यस्थता की कोशिश ऐसे समय में शुरू की है जब वह सात अरब डॉलर के आईएमएफ प्रोग्राम पर निर्भर है, और उसका केंद्रीय बैंक जून के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार को लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया कि यह एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसमें काफी संभावनाएं हैं, लेकिन यह बाहरी झटकों के प्रति बहुत संवेदनशील भी है.
Governmentी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के कुल आयात में तेल की हिस्सेदारी 16.64 प्रतिशत थी.
रिपोर्ट में बताया गया कि इसका मतलब है कि तेल की कीमत बढ़ने या सप्लाई में रुकावट आने से सीधे महंगाई और रुपया पर असर पड़ता है. जो Government कीमतों को स्थिर करने और आर्थिक भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रही है, उसके लिए क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के मामले में भी Pakistan खाड़ी देशों, खासकर कतर पर काफी निर्भर है, और मौजूदा तनाव ने इस कमजोरी को उजागर कर दिया है.
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बिजली की कमी बढ़कर करीब 3,400 मेगावाट तक पहुंच गई है, और उत्तरी Pakistan के कुछ इलाकों में रोजाना सात घंटे तक बिजली कटौती हो रही है.
Pakistan के वाणिज्य मंत्रालय ने माना है कि ईरान के साथ औपचारिक बैंकिंग चैनल की कमी के कारण कुछ लेन-देन अभी भी बार्टर (सामान के बदले सामान) के जरिए होते हैं, इसलिए Pakistan का साफ हित है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव लंबे संघर्ष में न बदले.
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एवाई/डीकेपी