
New Delhi, 13 जून . जोहो के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीधर वेम्बु ने Saturday को कहा कि उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल्स तक पहुंच पर अमेरिका द्वारा लगाए गए हालिया प्रतिबंध यह दिखाते हैं कि तकनीकी आत्मनिर्भरता कितनी महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने कहा कि तकनीक अब राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का केंद्र बन चुकी है.
अमेरिकी Government के निर्यात नियंत्रण नियमों के कारण एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल्स “मिथोस” और “फेबल” को अमेरिका के बाहर के यूजर्स के लिए निलंबित किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बु ने कहा कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि रणनीतिक तकनीकें अब वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित कर रही हैं.
उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “यह बहुत बड़ी बात है. अमेरिका के बाहर सभी लोगों के लिए मिथोस और फेबल एआई मॉडल्स की पहुंच बंद कर दी गई है.”
तकनीक को “सबसे बड़ा हथियार” बताते हुए वेम्बु ने कहा कि आज राष्ट्रीय संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सीधे तौर पर तकनीकी क्षमताओं से जुड़ चुकी हैं.
उन्होंने कहा, “वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है और India को अपना रास्ता खुद बनाना होगा.” वेम्बु ने कहा कि यह घटना India के लिए एक संकेत है कि उसे अपने घरेलू तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना चाहिए.
उन्होंने भारतीय संगठनों से छोटे एआई मॉडल्स अपनाने की अपील की, जिनमें India और चीन में विकसित ओपन सोर्स एआई मॉडल भी शामिल हैं. उनका कहना था कि पर्याप्त प्रयासों के साथ इन मॉडल्स को भी प्रभावी बनाया जा सकता है.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब कोई आपको तकनीक बेचने तक को तैयार नहीं है, तो फिर उन्हें पैसे क्यों दिए जाएं?”
वेम्बु ने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक एआई मॉडल तैयार करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों और उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) की जरूरत होती है, जो फिलहाल दुनिया के कुछ ही देशों के पास केंद्रित हैं.
उनके अनुसार, नई पीढ़ी के एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने में दसियों या यहां तक कि सैकड़ों अरब डॉलर तक का निवेश लग सकता है. इसके अलावा आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच भी अब विभिन्न प्रतिबंधों के दायरे में आ रही है.
उन्होंने कहा कि India को वैश्विक एआई कंपनियों की तरह भारी खर्च करने की बजाय वैकल्पिक और कम लागत वाले अनुसंधान तरीकों पर ध्यान देना चाहिए.
वेम्बु ने कहा, “जोहो लंबे समय से ऐसे वैकल्पिक अनुसंधान एवं विकास तरीकों पर काम कर रहा है, जिनकी लागत काफी कम है.” उन्होंने भरोसा जताया कि लगातार नवाचार और धैर्य के साथ अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.
उद्यमी वेम्बु ने आगे कहा कि भले ही अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित करने के लिए भारी पूंजी और विशेष हार्डवेयर की आवश्यकता हो, लेकिन India कम संसाधनों वाले नवाचारी तरीकों के माध्यम से भी अपनी एआई क्षमताओं को मजबूत कर सकता है.
इस बीच, एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने घोषणा की कि अमेरिकी Government ने उसे एक निर्यात नियंत्रण निर्देश जारी किया है, जिसके तहत उसे अपने उन्नत “फेबल 5” और “मिथोस 5” मॉडल्स की पहुंच विदेशी नागरिकों के लिए बंद करनी पड़ी है. यह प्रतिबंध कंपनी के अपने विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होगा, चाहे वे अमेरिका के भीतर हों या बाहर.
कंपनी ने कहा कि Governmentी निर्देश का पालन करने के लिए इन मॉडल्स की पहुंच अस्थायी रूप से बंद की जा रही है, जबकि उसके अन्य एआई मॉडल्स पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे.
एंथ्रोपिक ने यह भी कहा कि उसे लगता है कि यह फैसला किसी गलतफहमी के कारण लिया गया है और कंपनी प्रभावित मॉडल्स की पहुंच जल्द से जल्द बहाल कराने के लिए प्रयास कर रही है.
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डीबीपी