
संयुक्त राष्ट्र, 14 अप्रैल . संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने की अपील की है. यह जानकारी उनके प्रवक्ता ने दी.
प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने बताया कि Pakistan में आयोजित इस्लामाबाद वार्ता में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन बातचीत से यह साफ हुआ कि दोनों पक्ष गंभीरता से संवाद कर रहे हैं. इसे आगे की बातचीत के लिए एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना गया.
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं, इसलिए कोई समझौता तुरंत नहीं हो सकता. ऐसे में बातचीत को जारी रखना जरूरी है ताकि धीरे-धीरे समाधान निकल सके. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कई हफ्तों से चल रही तबाही और तनाव के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है.
प्रवक्ता ने कहा कि हफ्तों की तबाही और संकट के बाद, अब यह साफ हो गया है कि मौजूदा संघर्ष का कोई भी सैन्य समाधान नहीं है.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दुजारिक ने यह भी कहा कि संघर्ष-विराम (सीजफायर) को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए, और इसका उल्लंघन करने वाली सभी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि महासचिव इस बात पर जोर देते हैं कि इस संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य सहित सभी समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए.
प्रवक्ता ने बताया कि इस जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार में रुकावट आने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि उर्वरक और उसके कच्चे माल की आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण दुनिया भर में लाखों कमजोर लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का संकट और भी गहरा गया है; इसके अलावा, ईंधन, परिवहन और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के चलते जीवन-यापन की लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है.
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की योजना लागू करने का ऐलान किया, जो Monday से लागू हो गई है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, फारस की खाड़ी में करीब 20,000 नाविक अभी भी जहाजों पर फंसे हुए हैं और उन्हें हर दिन बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
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एएस/