यूएई का कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान ने दूसरे देश के सामने फैलाया हाथ, सऊदी अरब ने दिए 2 अरब डॉलर

New Delhi, 16 अप्रैल . Pakistan के Prime Minister शहबाज शरीफ तीन देशों, सऊदी अरब, कतर और तुर्किए, के दौरे पर हैं. पीएम शहबाज के दौरे के बीच सऊदी अरब ने Pakistan को 2 अरब डॉलर की मदद दी है.

दरअसल, Pakistan को संयुक्त अरब अमीरात ने इस महीने के अंत तक तीन अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए कहा था. ऐसे में Pakistan ने अब सऊदी अरब से मदद मांगी है, ताकि वह यूएई से लिया कर्ज लौटा सके.

Pakistanी मीडिया डॉन ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ Pakistan (एसबीपी) ने Thursday को पुष्टि की है कि Pakistan को सऊदी अरब से 2 अरब डॉलर मिले हैं. सेंट्रल बैंक ने कहा कि राशि 15 अप्रैल 2026 की वैल्यू डेट में मिली थी.

यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है, जब Prime Minister शहबाज शरीफ मिडिल ईस्ट में शांति को बढ़ावा देने और डिप्लोमैटिक कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए सऊदी अरब गए हैं.

डॉन के अनुसार, सऊदी अरब ने एक दिन पहले Pakistan के लिए अतिरिक्त 3 अरब डॉलर डिपॉजिट देने का वादा किया था और अपनी मौजूदा 5 बिलियन डॉलर की फैसिलिटी को तीन साल के लिए बढ़ा दिया.

वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि मौजूदा 5 बिलियन डॉलर सऊदी डिपॉजिट अब पिछले सालाना रोलओवर अरेंजमेंट के तहत नहीं आएगा और इसके बजाय इसे लंबे समय के लिए बढ़ाया जाएगा.

Pakistan के आर्थिक हालात बहुत बुरे हो चुके हैं, देश में महंगाई अपनी सीमा पार कर चुकी है. Pakistan के ऊपर विदेशी कर्ज बहुत ज्यादा है और यह पहले से ही बढ़ती ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट में तनाव से जुड़े आर्थिक असर से दबाव में है.

डॉन ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया कि 27 मार्च तक Pakistan का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व 16.4 बिलियन डॉलर था, जो करीब तीन महीने के इंपोर्ट को कवर करने के लिए काफी है. हालांकि, यूएई से रीपेमेंट की जरूरत ने देश की अर्थव्यवस्था पर नया दबाव डाल दिया है.

मार्च में, Pakistan 3.5 बिलियन डॉलर की फैसिलिटी को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौता करने में नाकाम रहा. यह सात साल में पहली ऐसी असफलता थी और इससे शॉर्ट-टर्म फाइनेंसिंग गैप को लेकर चिंता बढ़ गई.

Pakistanी मीडिया डॉन ने माना कि Pakistan की फॉरेन एक्सचेंज पोजीशन दबाव में है. आईएमएफ समर्थित रिफॉर्म्स के तहत एक बड़े स्टेबिलाइजेशन की कोशिश का हिस्सा बनी हुई है. विश्लेषकों का कहना है कि बाहरी फंडिंग रिस्क एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है, खासकर एनर्जी की अस्थिर कीमतों और सीमित ग्लोबल कैपिटल मार्केट के बीच.

केके/एबीएम

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