
Lucknow, 15 मई . Madhya Pradesh हाई कोर्ट की ओर से भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को मंदिर घोषित किए जाने पर पद्म भूषण साध्वी ऋतंभरा ने से बातचीत में कहा कि सत्य की जीत हुई है. सनातन समाज को बधाई.
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि कोई भी वहां जाएगा तो समझ में आ जाएगा कि वह हिंदुओं का मंदिर है. भोजशाला हमें मिल गई है. अब जल्द ही देवी सरस्वती की प्रतिमा वापस लौटाई जाएगी और भोजशाला में स्थापित की जाएगी.
भोजशाला को लेकर साध्वी निरंजन ज्योति ने से कहा कि गुलामी के कालखंड के दौरान आक्रांताओं ने हमारे धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया था. अदालत ने बहुत ही सुखद फैसला सुनाया है. हम इसके लिए न्यायपालिका और वकीलों का धन्यवाद और अभिनंदन करते हैं. अच्छे फैसलों से देश का स्वाभिमान जागता है. मां सरस्वती के आने का हमें पूरा विश्वास है. कोर्ट के आदेश का Government जरूर पालन करेगी.
वेद आचार्य रामस्वरूप महाराज ने से कहा कि अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है कि यह जगह एक मंदिर की है. हम इस फैसले का समर्थन करते हैं और अदालत का धन्यवाद करते हैं. यहां का एक-एक पत्थर बोल रहा है. वहां के पत्थरों पर उस समय से श्लोक अंकित हैं. हम इस फैसले का समर्थन करते हैं और न्यायालय को धन्यवाद देते हैं.
वीएचपी के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने से कहा कि मेरा मानना है कि यह एक बहुत अच्छा फैसला है. यह फैसला सुनाने से पहले, अदालत ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया. इस आदेश के बाद, हिंदुओं को वहां लगातार पूजा-अर्चना करने का अवसर मिला है. फैसले से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया. एएसआई रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षों को उपलब्ध कराई गई.
आलोक कुमार ने कहा कि इस मामले में सभी को विस्तार से बहस करने का अवसर मिला. सबकी सुनने के बाद दोनों न्यायाधीश ढांचे को देखने गए. सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे इस निर्णय पर पहुंचे कि धार की भोजशाला वाग्देवी सरस्वती मंदिर का स्थान है. इस स्थान की प्रकृति हमेशा मंदिर की रही है. इस फैसले के आने से हिंदुओं को पूजा करने का अवसर मिल गया है.
आलोक कुमार ने कहा कि न्यायालय ने मुस्लिम भावनाओं का भी ध्यान रखा है. कोर्ट ने उनसे कहा है कि आप मस्जिद के लिए Government से जगह मांग लीजिए. दोनों पक्षों के साथ न्याय हुआ है.
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एसडी/एबीएम