अमेरिका के साथ ट्रेड डील भारत को 2030 तक 100 अरब डॉलर का वस्त्र निर्यात का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगी

New Delhi, 7 फरवरी . अमेरिका के साथ ट्रेड डील India को 2030 तक 100 अरब डॉलर का वस्त्र निर्यात लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगी. यह बयान Saturday को Government की ओर से दिया गया.

वस्त्र मंत्रालय ने कहा कि इस डील से अपेक्षित गति मिलने की उम्मीद है, जिसमें 100 अरब डॉलर के वस्त्र निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में अमेरिका का योगदान 20 प्रतिशत से अधिक होगा.

मंत्रालय ने India और अमेरिका के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के वस्त्र व्यापार संबंधों को मजबूत करने वाला एक प्रमुख उत्प्रेरक बताया.

वस्त्र उद्योग ने आशा व्यक्त की कि यह समझौता इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा आर्थिक परिवर्तनकारी साबित होगा.

वस्त्र निर्यात के लिए, इस समझौते से वस्त्र, परिधान और तैयार वस्त्रों के 118 अरब डॉलर के अमेरिकी वैश्विक आयात बाजार के द्वार खुल गए हैं. अमेरिका India का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जहां लगभग 10.5 अरब डॉलर का निर्यात होता है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत परिधान और 15 प्रतिशत तैयार वस्त्र शामिल हैं. ऐसे में यह एक बड़ा अवसर है.

परिधान और तैयार वस्त्रों सहित सभी वस्त्र उत्पादों पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क न केवल भारतीय निर्यातकों की मौजूदा समस्या को दूर करेगा, बल्कि उन्हें बांग्लादेश (20 प्रतिशत), चीन (30 प्रतिशत), Pakistan (19 प्रतिशत) और वियतनाम (20 प्रतिशत) जैसे अधिकांश प्रतिस्पर्धियों से बेहतर स्थिति में लाएगा, जिनके पारस्परिक शुल्क इससे अधिक हैं.

मंत्रालय ने कहा, “इससे बाजार की गतिशीलता में बदलाव आएगा, क्योंकि बड़े खरीदार इस समझौते के चलते अपनी खरीददारी पर पुनर्विचार करेंगे.”

यह समझौता उद्योग को लागत प्रतिस्पर्धी बनने और अमेरिका से वस्त्र क्षेत्र के लिए मध्यवर्ती सामग्री की खरीददारी करके अपने जोखिमों को कम करने में भी सक्षम बनाएगा.

इससे देश में मूल्यवर्धित वस्त्रों के निर्माण में सुविधा होगी और हमारे उत्पादन और निर्यात में विविधता आएगी. मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते से अतिरिक्त रोजगार सृजित होगा और अमेरिकी कंपनियों द्वारा निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.

अमेरिकी व्यापार समझौते का ढांचा India के वस्त्र और परिधान क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है.

एबीएस/

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