
Mumbai , 13 अगस्त . देश की आजादी के 80वें वर्ष में India एक ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने जा रहा है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जाएगा. इस मुद्दे पर Samajwadi Party के Maharashtra प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने कहा कि जिन्हें गाना है वे गाए हमें दिक्कत नहीं है. हालांकि, शरीयत को मानने वाले अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं कर सकते हैं.
Mumbai में से बातचीत में अबू आजमी ने कहा कि जो लोग सत्ता में हैं, वे कानून बना सकते हैं और ऐसे मामलों पर संसद तथा विधानसभा में चर्चा होती है. उन्होंने कहा कि यदि किसी चीज को लोगों पर जबरन थोपा जाता है तो देश में कानून और न्यायपालिका मौजूद हैं और अंतिम फैसला अदालतें ही करेंगी. जिन्हें वंदे मातरम गाना है, वे गाएं, हम सुनेंगे. जो लोग ‘वंदे मातरम्’ गाते हैं, हमें उनसे कोई एतराज नहीं है. लेकिन जो लोग शरीयत को मानते हैं, उनके लिए यह धार्मिक मजबूरी है कि वे अल्लाह के अलावा किसी और की वंदना नहीं कर सकते. क्या आप उन्हें उनके मजहब से अलग कर देंगे? जो लोग अपने मजहब के अनुसार जीवन जीते हैं, उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए.
दिल्ली धमाके को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट पर आजमी ने कहा कि आतंकवादियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, चाहे उनका संबंध Pakistan से हो या अल-कायदा जैसे किसी आतंकी संगठन से, जो सचमुच आतंकवादी हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें फांसी दिए जाने से भी किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. लेकिन मैंने ऐसे कई मामले देखे हैं, जिनमें लोगों को अल-कायदा या अन्य संगठनों के नाम पर गिरफ्तार किया गया और बाद में उनके खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया.
उन्होंने Mumbai सीरियल ब्लास्ट मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई पढ़े-लिखे लोग वर्षों तक जेल में रहे और बाद में बरी हो गए. उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग वर्षों तक जेल में रहे लेकिन उनके जीवन के वे साल आखिर कौन वापस करेगा.
एफसीआरए बिल को लेकर अबू आजमी ने केंद्र Government पर अल्पसंख्यकों को परेशान करने वाले मुद्दे उठाने का आरोप लगाया. तीन तलाक, ‘वंदे मातरम्’ और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों को लेकर मुसलमानों को निशाना बनाने की राजनीति की जा रही है. इन मुद्दों के जरिए वोट लेने की कोशिश हो रही है जबकि देश में विकास के कामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
सपा Government में आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने पर अबू आजमी ने कहा कि इस बारे में पार्टी नेतृत्व जो फैसला करेगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे. शिवपाल यादव हों या अखिलेश यादव, जो भी तय करेंगे, हम उसे मानेंगे.
आजम खान के सपा से नाराज होने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि आजम खान पार्टी से नाराज नहीं हैं और उन्हें पार्टी में पूरा सम्मान प्राप्त है. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष भी उनका बहुत सम्मान करते हैं. मुसलमान केवल धर्म के आधार पर वोट नहीं करता बल्कि संविधान और पार्टी की विचारधारा को देखकर अपना निर्णय करता है.
उन्होंने कहा कि मुसलमान केवल किसी उम्मीदवार का धर्म देखकर वोट नहीं देता. वह संविधान के अनुसार चलने वाले लोगों को समर्थन देता है. Samajwadi Party को उसकी विचारधारा के आधार पर वोट मिलता है.
Maharashtra में ऑटो और टैक्सी चालकों सहित सेवा प्रदाताओं के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर अबू आजमी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में Chief Minister और संबंधित मंत्री से बात की है.
उन्होंने कहा कि Chief Minister ने आश्वासन दिया था कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे किसी को परेशानी हो. आजमी के अनुसार, उन्होंने मंत्री से भी कहा था कि लोगों को मराठी सीखने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए. Mumbai में दूसरे शहरों और राज्यों से लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए आते हैं. यदि मराठी भाषा को अनिवार्य किया जाता है, तो शुरुआत में उन्हें दिक्कतें हो सकती हैं. लोगों को भाषा सीखने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए.
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डीकेएम/पीएम