
तिरुवनंतपुरम, 21 मई . संसदीय परंपरा और Political नाटकीयता के मिश्रण वाले एक घटनाक्रम में सात बार के कांग्रेस विधायक थिरुवनचूर राधाकृष्णन को Friday को केरल विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया. यह चुनाव एक ऐतिहासिक त्रिकोणीय मुकाबले के बाद हुआ, जिसने राज्य में नए Political समीकरणों को उजागर किया.
केरल विधानसभा के अध्यक्ष पद के चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले तीनों Political गठबंधनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे.
सत्तारूढ़ यूडीएफ ने अनुभवी विधायक थिरुवनचूर राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया जबकि वाम मोर्चे ने पूर्व मंत्री एसी मोइदीन को मैदान में उतारा और भाजपा-नीत एनडीए ने अपने तीन सदस्यीय दल के सदस्य बीबी गोपकुमार को प्रत्याशी बनाया.
प्रोटेम स्पीकर जी सुधाकरण ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाई और मतदान में हिस्सा नहीं लिया. कुल 139 विधायकों ने मतदान किया.
परिणाम घोषित करते हुए उन्होंने बताया कि राधाकृष्णन को 101 वोट मिले, मोइदीन को 35 और गोपकुमार को 3 वोट मिले.
घोषणा के बाद सदन में जोरदार मेज-थाप हुई और विभिन्न दलों के सदस्य उन्हें बधाई देने के लिए आगे आए. एक प्रतीकात्मक और संसदीय परंपरा को दर्शाने वाले दृश्य में Chief Minister वीडी सतीशन और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने संयुक्त रूप से नए स्पीकर को उनकी कुर्सी तक पहुंचाया.
सतीशन ने उन्हें विनम्र और परिपक्व व्यवहार वाला आदर्श नेता बताते हुए कहा कि वे पहले छात्र आंदोलन के दिनों में भी उनके लिए नारे लगाते थे. उन्होंने यह भी कहा कि राधाकृष्णन ने लगभग 17 विभाग संभाले हैं और अपने क्षेत्र के विकास पर लगातार ध्यान दिया है.
विजयन ने भी उनके लंबे संसदीय और सार्वजनिक जीवन के अनुभव की सराहना की और विश्वास जताया कि वे अपनी नई जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाएंगे.
समझौता-आधारित राजनीति के लिए जाने जाने वाले राधाकृष्णन कोट्टयम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और 1987 में पहली चुनावी हार के बाद 1991 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं.
वे पूर्व Chief Minister ओमान चांडी के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुके हैं और अब केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कार्यभार संभाल रहे हैं.
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पीएम