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Tuesday, 3 November 2026
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पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान ऊर्जा संकट से निपटने में केंद्र सरकार का काम असाधारण रहा: अमिताभ कांत

पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान ऊर्जा संकट से निपटने में केंद्र Government का काम असाधारण रहा: अमिताभ कांत

New Delhi, 29 जून . India के पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने Monday को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में India Government ने असाधारण काम किया. उन्होंने कहा कि Government की प्रभावी रणनीति के कारण देश के उपभोक्ताओं पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ा, ईंधन की कालाबाजारी नहीं हुई और घरों तक एलपीजी सिलेंडर की नियमित आपूर्ति जारी रही.

न्यूज एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अमिताभ कांत ने कहा, “मैं इस दौरान India Government द्वारा उठाए गए कई कदमों की सराहना करना चाहूंगा. यह संकट हमारी वजह से नहीं आया था, बल्कि यह पूरी दुनिया का संकट था. दुनिया के लगभग हर देश में उपभोक्ता प्रभावित हुए, लेकिन India में किसी भी उपभोक्ता पर इसका असर नहीं पड़ा. मेरे विचार से यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. Government ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम किया और साथ ही ईंधन आपूर्ति के स्रोतों का भी विस्तार सुनिश्चित किया.”

उन्होंने कहा कि Government ने इस संकट का सामना दूरदृष्टि और मजबूती के साथ किया. कोविड महामारी की तरह इस संकट के दौरान भी सभी मंत्रालयों ने मिलकर काम किया.

उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते India के 12 जहाज कच्चा तेल लेकर सुरक्षित देश वापस पहुंचे. उन्होंने इसे India की सफल कूटनीति का बड़ा उदाहरण बताया.

नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने कहा कि India दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो अपनी जरूरत का लगभग 86 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. इसके बावजूद Government ने ऊर्जा संकट का जिस तरह सामना किया, वह पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है.

उन्होंने कहा कि Government ने पेट्रोल पर 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर उत्पाद शुल्क को शून्य तक लाकर वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रण में रखा.

अमिताभ कांत ने बताया कि Government ने यह भी सुनिश्चित किया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 642 रुपए में एलपीजी सिलेंडर मिलता रहे, जबकि उसकी वास्तविक उत्पादन लागत लगभग 1,600 रुपए थी. यानी Government प्रति सिलेंडर करीब 900 रुपए की सब्सिडी दे रही थी.

उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कदम एलपीजी नियंत्रण आदेश था, जिसके कारण India की रिफाइनरियों में एलपीजी का उत्पादन काफी बढ़ गया.

उन्होंने बताया कि Government ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए 27 नए देशों को भी जोड़ा, जिससे आयात के स्रोतों में बड़ा विस्तार हुआ.

उन्होंने कहा कि एलपीजी नियंत्रण आदेश के कारण वे रिफाइनरियां भी एलपीजी बनाने लगीं, जो पहले इसका उत्पादन नहीं करती थीं. यह इस बात का बड़ा उदाहरण है कि India की रिफाइनरियां जरूरत पड़ने पर तेजी से खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकती हैं.

उन्होंने कहा, “हमने अपनी रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया और पाइपलाइन नेटवर्क का भी विस्तार सुनिश्चित किया.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने का समय आ गया है, तो अमिताभ कांत ने कहा, “स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगा. भू-Political तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उम्मीद है कि आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होंगी और India को इसका लाभ मिलेगा.”

उन्होंने कहा कि इससे केवल India ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी फायदा होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय आने पर Government उपभोक्ताओं और देश के नागरिकों के हित में आवश्यक निर्णय जरूर लेगी.

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डीबीपी

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