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Wednesday, 4 November 2026
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दीया मिर्जा वीडियो विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को भाई जगताप ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया

दीया मिर्जा वीडियो विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को भाई जगताप ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया

Mumbai , 3 नवंबर . कांग्रेस नेता और Maharashtra विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने दीया मिर्जा के प्रदूषण मुक्त दिवाली वाले वीडियो, राहुल गांधी पर Chief Minister देवेंद्र फडणवीस की टिप्पणी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रैली को लेकर भाजपा पर जुबानी हमला किया. बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से बीएमसी को दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिए जाने पर उन्होंने इसे भाजपा की कथित छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया. वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों से जुड़े दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि Government ने करोड़ों लोगों के मताधिकार को प्रभावित किया है.

बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से बीएमसी को दीया मिर्जा का ‘प्रदूषण मुक्त दिवाली’ वाला वीडियो फिर से अपलोड करने के निर्देश पर भाई जगताप ने अदालत का आभार जताया. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर करारा तमाचा मारा है. दीया मिर्जा एक पर्यावरण कार्यकर्ता, पूर्व मिस इंडिया और Actress हैं. वह पर्यावरण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं और उनका वीडियो भी प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया था. भाजपा ने केवल दीया मिर्जा के मुस्लिम होने के कारण उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया. उन्होंने कहा कि यदि Government या महानगरपालिका ने किसी व्यक्ति को पर्यावरण से जुड़े अभियान के लिए आमंत्रित किया है, तो उसके काम को धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. देश का संविधान सभी 140 करोड़ नागरिकों के लिए समान है. किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने इस पूरे मामले में भाजपा की राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा की.

Chief Minister देवेंद्र फडणवीस की राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने हमेशा नीला संविधान देखा है और राहुल गांधी लाल संविधान लेकर घूम रहे हैं, पर भी भाई जगताप ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संविधान नीला या लाल नहीं होता. देश का संविधान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान है और उसकी पहचान किसी रंग से नहीं की जा सकती. संविधान में क्या लिखा है और उसमें दिए गए अधिकारों का किस तरह पालन किया जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण है. Prime Minister मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी संसद में संविधान को माथे पर लगाकर आते हैं, लेकिन इसके बाद भी संविधान की भावना के विपरीत काम करते हैं. Prime Minister हों या Chief Minister , सभी को संविधान के मूल्यों का पालन करना चाहिए. संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों की आत्मा है और उसका कोई रंग नहीं होता.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दावे पर कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए तीन करोड़ नाम घुसपैठियों के थे और कांग्रेस ने उनके नाम दर्ज करवाए थे, भाई जगताप ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि Government ने तीन करोड़ नहीं, बल्कि साढ़े तेरह करोड़ लोगों के नाम कटवाए हैं. यदि तीन करोड़ लोग कथित तौर पर घुसपैठिए थे, तो बाकी साढ़े दस करोड़ लोगों के नाम क्यों हटाए गए? उन्होंने सवाल किया कि लोगों का संवैधानिक अधिकार छीनने का अधिकार निर्वाचन आयोग को किसने दिया. जगताप ने आरोप लगाया कि यह सब Government के निर्देश पर हुआ और भाजपा का उद्देश्य मतदाता सूची में बदलाव करके चुनावी लाभ हासिल करना है.

उन्होंने अमित शाह के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि ये लोग घुसपैठिए थे, तो 2014 में सत्ता में आने के बाद Government ने उनकी पहचान कर कार्रवाई क्यों नहीं की? कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा का एजेंडा वोट चोरी के जरिए सत्ता में बने रहना है. जनता अब Government के दावों को समझ चुकी है. इसलिए अब हमने नया नारा दिया है, ‘तब लड़ रहे थे गोरों से आजादी के पहले, अब लड़ेंगे तुम्हारे जैसे वोट चोरों से.’

दिल्ली में कांग्रेस की रैली के विरोध में भाजपा की ओर से विभिन्न राज्यों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाले जाने पर भी भाई जगताप ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की Government है. ऐसे में यदि लोकतंत्र खतरे में है, तो इसकी जिम्मेदारी भी Government की ही बनती है. सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना देश के नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. छात्र, महिलाएं और युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें अराजकता फैलाने वाला नहीं कहा जा सकता. जगताप ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठियां चलाई गईं और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया. उन्होंने किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दिल्ली में 7 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान गंवाई. Government इन घटनाओं को अराजकता नहीं मानती, लेकिन अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को इसी नाम से प्रचारित करती है. केंद्र और राज्य Governmentें लोकतांत्रिक तरीके से शासन नहीं चला रही हैं.

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पीएसके

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