
Bhopal , 28 अप्रैल . Madhya Pradesh के Chief Minister मोहन यादव ने ऐलान किया है कि लोधी राजा हिरदेशाह लोधी को पाठ्यक्रम में शामिल कराएंगे और उनके नाम से तीर्थ स्थल का भी निर्माण कराएंगे.
राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) के अवसर पर राजधानी Bhopal के जंबूरी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में Chief Minister यादव ने कहा कि नर्मदा टाइगर के नाम से पहचान रखने वाले राजा हिरदेशाह ने अंग्रेज शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष का संकल्प लिया. वे अपने भाइयों के साथ 1858 तक संघर्ष करते रहे.
उन्होंने कहा कि राजा हिरदेशाह ने बुंलेदखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट करके अंग्रेजों के सामने आंदोलन शुरू किया था. राज्य Government उनके संघर्ष पर शोध कराएगी. उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को लिपिबद्ध कर शिक्षा विभाग में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा. राज्य Government ने प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों का सम्मान करते हुए सबसे पहले रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की. रानी अवंतीबाई का योगदान 1857 की क्रांति में सबसे बड़ा है.
सीएम मोहन यादव ने कहा कि राज्य Government सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्योहार धूमधाम से मना रही है. राज्य Government ने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है. नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा. इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ फिर से खुलने चाहिए. महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है. प्रदेश Government सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है, इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं. सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने वर्ष 1842 से वर्ष 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा. लोधी समाज सामर्थ्यवान है. इस समाज के सदस्यों ने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया. समाज के युवाओं को साहसी, शक्तिमान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है. हमारा संकल्प समाज के साथ है.
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था. उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए.
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एसएनपी/डीकेपी