तकनीक और रिसर्च के जरिए टेक्सटाइल सेक्टर को मिल रही नई गति : केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

Patna, 20 दिसंबर . Union Minister गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों, शोध की भूमिका और सस्टेनेबिलिटी को लेकर India की बढ़ती वैश्विक पहचान पर विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि Prime Minister Narendra Modi के शासनकाल में तकनीक और रिसर्च के जरिए टेक्सटाइल सेक्टर को नई गति मिल रही है, जो आने वाले समय में देश के विकास में अहम भूमिका निभाएगी.

उन्होंने Saturday को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि Prime Minister Narendra Modi के शासनकाल में तकनीक को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. इस बात को भली भांति समझा जा सकता है कि हम बिना तकनीक के कुछ भी नहीं कर सकते हैं. तकनीक से हमारे विकास को नई गति मिलती है और Prime Minister Narendra Modi के शासनकाल में हमें तकनीक के अलग-अलग स्वरूप देखने को मिलते हैं.

Union Minister ने कहा कि आज की तारीख में टेक्सटाइल के क्षेत्र में भी तकनीक का हस्तक्षेप व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है. इस टेक्सटाइल क्षेत्र में नई गति देखने को मिल रही है. आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में काफी प्रयोग होते हुए दिखेंगे. आज समस्त विश्व की निगाहें India पर हैं, क्योंकि हमारा देश सस्टेनेबिलिटी को काफी प्राथमिकता देता है.

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल में नेचुरल फाइबर से लेकर टेक्निकल फाइबर और कार्बन फाइबर तक सभी आते हैं, चाहे स्पेस के लिए फाइबर बनाना हो या फैशन के लिए या फिर बल्क कंटेनर के लिए. आज India में टेक्निकल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट नहीं करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. यह सब कुछ शोध की वजह से मुमकिन हो पाया है. आज हम सभी लोगों को यह बात समझनी होगी कि बिना शोध के हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं और अगर आज हम टेक्सटाइल के क्षेत्र में इस विकास की गति को देख पा रहे हैं, तो मुख्यत: इसका श्रेय शोध को जाता है. आगामी दिनों में हमें इसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे. हम कितना भी कुछ कर लें, लेकिन हमें रिसर्च का सहारा लेना ही पड़ता है.

Union Minister गिरिराज सिंह ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि टेक्सटाइल से जुड़ी इस बैठक में आगामी दिनों में एक नई चीज निकलकर सामने आएगी, जिससे हमारे देश के विकास को नई गति मिलेगी. हमें पूरा भरोसा है कि Prime Minister Narendra Modi के शासनकाल में हम नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे.

एसएचके/एएस

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