तमिलनाडु : स्टालिन ने 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन पर हमला बोला, भाजपा पर राष्ट्रीय सुरक्षा के सवालों से डरने का आरोप लगाया

चेन्नई, 4 फरवरी . तमिलनाडु के Chief Minister और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने Wednesday को Lok Sabha से विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किए जाने को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र Government पर जुबानी हमला किया. उन्होंने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक और Political रूप से प्रेरित बताया.

एम.के. स्टालिन ने सवाल उठाया कि केंद्र Government Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन के मुद्दों पर जांच का सामना करने से क्यों हिचकिचा रही है. निलंबन की निंदा करते हुए, स्टालिन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को चुप कराना संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करता है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद को बहस, जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक मंच के रूप में काम करना चाहिए, न कि ऐसी जगह के रूप में जहां असहमति की आवाजों को दबाया जाए.

social media पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, स्टालिन ने सीधे तौर पर केंद्र Government की मंशा पर सवाल उठाया और पूछा कि Government गांधी द्वारा उठाए गए सवालों से क्यों ‘डर’ रही है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा Government सदन के सदस्यों द्वारा उठाए गए चिंताओं का जवाब देने के लिए बाध्य है, खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के आर्थिक हितों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर.

Chief Minister ने निलंबन को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर बोलने के सांसदों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों को बहस में भाग लेने का अवसर न देना लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करता है और संसदीय कामकाज के लिए एक परेशान करने वाली मिसाल कायम करता है.

स्टालिन की यह टिप्पणी Lok Sabha में बजट सत्र के दौरान हुए नाटकीय दृश्यों के एक दिन बाद आई है. सदन में विरोध प्रदर्शनों के बीच अनुशासनहीन आचरण के आधार पर आठ विपक्षी सांसदों, सात कांग्रेस से और एक सीपीआई-एम से, को सत्र के बाकी बचे समय के लिए निलंबित कर दिया गया था.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टकराव तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद के बारे में चिंता जताते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण के कुछ हिस्सों का हवाला देने की कोशिश की. अध्यक्ष ने इस संदर्भ की अनुमति नहीं दी, जिससे विपक्षी बेंचों से तीखा विरोध हुआ. स्थिति जल्दी ही शोर-शराबे और बार-बार व्यवधान में बदल गई, जिससे सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.

एससीएच

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