
New Delhi, 23 जून . वर्ष 1993 के कोलकाता बोबाजार (बहूबाजार) बम धमाके के केस में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी मोहम्मद राशिद खान की रिहाई के खिलाफ दाखिल बंगाल Government की याचिका पर Supreme Court ने राशिद और केंद्र Government को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
Supreme Court ने राशिद खान की रिहाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. अब Supreme Court इस इस मामले पर 28 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा.
राशिद खान के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट से 5 जून को रिलीज का आदेश पारित हुआ था, उसको स्वास्थ्य सम्बंधी कई बीमारियां हैं. 30 साल से ज्यादा समय से जेल में है, उसका जेल में व्यवहार अच्छा था. इसलिए हाईकोर्ट के आदेश में दखल न दी जाए. Supreme Court ने कहा कि वह एक मास्टरमांइड था. किसी मामले में एक से ज्यादा मास्टरमांइड नहीं हो सकते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 जून को दिए अपने आदेश में 33 साल से जेल में बंद राशिद खान की रिहाई का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने जेल में उसके लंबे वक्त और उसके व्यवहार के मद्देनजर यह रियायत देने का फैसला किया था. हाईकोर्ट के फैसले को लेकर बंगाल Government का कहना है कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की राय राशिद खान की रिहाई के खिलाफ थी.
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बंगाल Government Supreme Court पहुंची है. राज्य Government की ओर कहा गया कि आतंकवाद जैसे जघन्य अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति को समय से पहले रिहा करना पीड़ितों और उनके स्वजन के साथ अन्याय होगा.
राशिद खान की ओर से अपनी याचिका में कहा गया था कि इसी मामले के दोषी पन्नालाल जायसूरा को वर्ष 2014 में समयपूर्व रिहा कर दिया गया था.
16 मार्च 1993 की रात को कोलकाता के बहुबाजार क्षेत्र में भयानक विस्फोट किया गया था. इस हादसे में 69 लोगों की जान चली गई थी और कई बिल्डिंगें ध्वस्त हो गई थीं.
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एसडी/वीसी