Supreme Court ने मूर्ति तस्करी के आरोपी सुभाष चंद्र कपूर को जर्मनी भेजने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

New Delhi, 27 अक्टूबर . Supreme Court ने मूर्ति तस्करी के आरोपी सुभाष चंद्र कपूर को जर्मनी वापस भेजने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. मद्रास हाईकोर्ट ने 8 सितंबर को अपने फैसले में केंद्र Government को निर्देश दिया था कि वह कपूर को तिरुचिरापल्ली की केंद्रीय जेल से अपनी हिरासत में लेकर दो सप्ताह के भीतर जर्मनी वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करे.
सुभाष चंद्र कपूर के खिलाफ तमिलनाडु में मंदिरों से प्राचीन मूर्तियों की कथित चोरी और तस्करी से जुड़े कई मामले लंबित हैं. याचिकाकर्ता एस. विजय नारायण ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को Supreme Court में चुनौती दी थी.
मंदिरों की ओर से पेश हुए वकील एस. विजय नारायण ने दलील दी कि कपूर को जर्मनी वापस भेजने का आदेश देते समय अन्य लंबित आपराधिक मामलों, लापता केस डायरियों की जांच और अमेरिका के प्रत्यर्पण अनुरोध पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया.
याचिका में प्रत्यर्पण कानून के तहत लागू होने वाले ‘रूल ऑफ स्पेशियलिटी’, यानी विशिष्टता के सिद्धांत की व्याख्या से जुड़ा सवाल भी उठाया गया है. इस सिद्धांत के तहत प्रत्यर्पित व्यक्ति पर आम तौर पर उन अपराधों के लिए मुकदमा चलाने पर प्रतिबंध हो सकता है, जिनके लिए उसका प्रत्यर्पण नहीं किया गया था. हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि India आने के बाद देश के भीतर कथित तौर पर किए गए अलग-अलग अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए जर्मनी की नई अनुमति आवश्यक नहीं होनी चाहिए.
याचिका के मुताबिक, सुभाष चंद्र कपूर को अक्टूबर 2011 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था. India के अनुरोध और दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण प्रक्रिया के बाद उसे 13 जुलाई 2012 को India लाया गया था. उसका प्रत्यर्पण तमिलनाडु के उदयारपालयम Police स्टेशन में दर्ज एक मामले के आधार पर हुआ था. यह मामला एक मंदिर से 18 प्राचीन पंचलोहा और पत्थर की मूर्तियों की चोरी से संबंधित था.
याचिकाकर्ता का कहना है कि India आने के बाद तमिलनाडु Police और आइडल विंग सीआईडी की जांच में कपूर की कथित भूमिका कई अन्य मंदिरों से मूर्तियों की चोरी के मामलों में भी सामने आई. याचिका के अनुसार, जांच में मंदिरों से प्राचीन मूर्तियों की कथित चोरी, उन्हें विदेश भेजने और इस गतिविधि से जुड़े नेटवर्क द्वारा कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामलों की भी पड़ताल की गई.
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डीएससी


