
New Delhi, 28 सितंबर . Supreme Court ने Monday को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) को निर्देश दिया कि वह संशोधित थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने में कक्षा 6 के छात्रों को भी वही छूट दे, जो पहले ही कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी जा चुकी है.
India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि अभी कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की अनिवार्य बोर्ड परीक्षा न देनी पड़े.
सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी द्वारा बताई गई अंतरिम व्यवस्था पर ध्यान देने के बाद यह निर्देश जारी किया. इस व्यवस्था के तहत कक्षा 7, 8 और 9 के छात्र तीसरी भाषा की पढ़ाई तो जारी रखेंगे, लेकिन उन्हें इस विषय के लिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होना होगा.
Supreme Court ने कहा, “इसमें कोई पास/फेल नहीं होगा. केवल उपस्थिति का प्रमाण पत्र दिया जाएगा.” कोर्ट ने यह बात तब कही जब केंद्र Government ने कक्षा 6 के छात्रों को भी यह छूट देने का विरोध किया था.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि Supreme Court के उस सुझाव पर विस्तार से चर्चा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 6 के मौजूदा बैच के छात्रों को संशोधित थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला से छूट दी जाए.
केंद्र Government के दूसरे सबसे बड़े कानूनी अधिकारी ने कहा कि Government कक्षा 6 के छात्रों को यह छूट देने के पक्ष में नहीं है और उन्होंने मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए नीति को लागू करने की अनुमति मांगी.
एसजी मेहता ने बेंच को बताया कि 28,819 सीबीएसई स्कूलों में से केवल 1.2 प्रतिशत स्कूलों में ही जरूरी सुविधाएं अभी तक नहीं जुटाई जा सकी हैं, जबकि बाकी स्कूल नियमों का पालन कर रहे हैं और वहां पाठ्यपुस्तकें व अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध हैं.
हालांकि, Supreme Court ने संकेत दिया कि कक्षा 6 के छात्रों के लिए ‘सॉफ्ट लॉन्च’ (धीरे-धीरे लागू करने की प्रक्रिया) अपनाया जा सकता है, क्योंकि इस चरण में संशोधित ढांचे को लागू करने में लॉजिस्टिकल (प्रशासनिक और व्यावहारिक) कठिनाइयां आ सकती हैं.
अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने स्कूलों की तैयारियों के बारे में दी गई जानकारी को दर्ज किया और निर्देश दिया कि कक्षा 6 के छात्रों को भी वही छूट दी जा सकती है, जो कक्षा 7 के छात्रों को दी गई है.
इस छूट का मतलब है कि कक्षा 6 के छात्र अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में तीसरी भाषा की पढ़ाई तो जारी रखेंगे, लेकिन कक्षा 10 में पहुंचने पर उन्हें इस विषय की अनिवार्य सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसके साथ ही तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा के कारण उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट करने या सर्टिफिकेशन (प्रमाणन) में कोई रुकावट नहीं आएगी. सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने यह भी कहा कि अगर कोई स्कूल तीसरी भाषा के इंटरनल असेसमेंट (आंतरिक मूल्यांकन) के आधार पर किसी छात्र को रोकता है, तो Supreme Court दखल देगा.
कोर्ट ने सीबीएसई को एक अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया जो उन स्कूलों से संपर्क करे, जिन्होंने अभी तक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया है और पता लगाए कि उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
Supreme Court सीबीएसई के बदले हुए थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. इस फॉर्मूले के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होती हैं, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं.
इससे पहले Supreme Court ने बदली हुई पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था और केंद्र Government, सीबीएसई और नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) से जवाब मांगा था.
याचिकाओं में सीबीएसई के सेकेंडरी स्कूल करिकुलम (कक्षा 9-10) 2026-27 और 9 अप्रैल व 4 मई के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी. इनमें तर्क दिया गया था कि बदले हुए फ्रेमवर्क ने कक्षा 6 से ही दो भारतीय भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य करके छात्रों के एकेडमिक विकल्पों को सीमित कर दिया है.
सीनियर वकील आनंद ग्रोवर, वकील तृप्ति टंडन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड रोहित कुमार-I ने याचिकाकर्ताओं की ओर से शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता पर भी चिंता जताई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि बदला हुआ करिकुलम एकेडमिक सेशन शुरू होने के बाद लागू किया गया था.
Supreme Court ने पहले बदली हुई पॉलिसी को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता सहित इसके कार्यान्वयन से जुड़ी चिंताओं की जांच करने पर सहमति जताई थी.
इसके बाद सीबीएसई ने तीसरी भाषा के लिए बदलाव के दौरान की व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए. मौजूदा छूट के तहत, कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को कक्षा 10 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा.
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डीके/डीकेपी