
तिरुवनंतपुरम, 14 मई . पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी ने Thursday को कहा कि वह पार्टी आलाकमान के उस फैसले का पूरी तरह समर्थन करते हैं, जिसमें वी.डी. सतीशन को केरल का 13वां Chief Minister बनाने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा, उन्होंने लोगों से अपील की कि नई राज्य Government के गठन के बाद वे सतीशन को कुछ समय दें.
उन्होंने से बात करते हुए कहा, “मैं कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले का पूरी तरह समर्थन करता हूं. सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह फैसला लिया है.”
एक दशक बाद राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बारे में एंटनी ने जोर देकर कहा, “यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की Government है.”
बाद में, पत्रकारों से बात करते हुए एंटनी ने दोहराया कि यह एक ‘सोच-समझकर’ लिया गया फैसला है.
कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने लोगों को धैर्य रखने और नई Government को समय देने की सलाह दी.
उन्होंने कहा, “मेरी बस यही अपील है कि कृपया सतीशन को इस मुश्किल हालात से निकलने के लिए कुछ उचित समय दें. केरल पूरी तरह से दिवालिया हो चुका है, इसलिए उन्हें कुछ समय चाहिए.”
इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए, कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने खुशी जाहिर की कि केरल के लोगों की ‘उम्मीदों’ को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मान लिया है. एंटनी ने कहा, “हम बहुत खुश हैं कि केरल के लोगों की उम्मीदों को आलाकमान ने स्वीकार कर लिया है, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व ने वी.डी. सतीशन को केरल के Chief Minister के रूप में स्वीकार किया है.”
ईडन ने कहा कि सतीशन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पिछले पाँच सालों से एक ‘लड़ाई’ लड़ी है.
उन्होंने कहा, “उनकी इस लड़ाई ने एलडीएफ के विनाशकारी शासन का अंत कर दिया. विधानसभा के अंदर और बाहर, जिस तरह के आंदोलन और मुद्दे उन्होंने उठाए, उससे केरल के लोगों में जबरदस्त आत्मविश्वास जगा.”
उन्होंने आगे कहा, “यही एकमात्र कारण है कि केरल के लोगों ने उन्हें Chief Minister के तौर पर स्वीकार किया है. हम आलाकमान द्वारा लिए गए इस फैसले की सचमुच सराहना करते हैं और उसकी तारीफ करते हैं.”
इस बीच, Chief Minister -पद के लिए नामित वी.डी. सतीशन ने कांग्रेस नेतृत्व द्वारा फैसला पक्का करने में लिए गए समय से जुड़े सवालों के जवाब दिए.
उन्होंने को बताया कि इस प्रक्रिया में व्यापक विचार-विमर्श शामिल था और इसे देरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि यह कोई देरी थी. यह एक प्रक्रिया है. पहले, मीडिया और social media की इतनी गहन निगरानी नहीं होती थी. कभी-कभी तो झूठी खबरें भी फैल जाती हैं. नेतृत्व ने किसी फैसले पर पहुंचने से पहले पूर्व पीसीसी अध्यक्षों, कार्यसमिति के सदस्यों, विधायकों और सांसदों के साथ इस मामले पर चर्चा की.”
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एससीएच