ओडिशा: मयूरभंज के स्कूल में छात्र की मौत; सैकड़ों बीमार, एनसीएसटी ने ओडिशा सरकार से मांगी रिपोर्ट

भुवनेश्वर, 27 अप्रैल . राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने Odisha के अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव, मयूरभंज के कलेक्टर और Police अधीक्षक को एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में जिले के एक आश्रम स्कूल में एक आदिवासी नाबालिग छात्र की मौत और छात्रों के सामूहिक रूप से बीमार पड़ने के मामले में ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ (एक्शन टेकन रिपोर्ट) मांगी गई है.

15 अप्रैल को बीजू जनता दल के नेता प्रियब्रत माझी और अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने India के संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत उसे प्राप्त शक्तियों के अनुसार इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया है.

आयोग ने निर्देश दिया कि तथ्य और जानकारी, साथ ही उक्त आरोपों पर की गई कार्रवाई, नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर, डाक द्वारा, व्यक्तिगत रूप से या संचार के किसी अन्य माध्यम से प्रस्तुत की जाए.

अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के कमिश्नर और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तय समय के भीतर, घटना की विस्तृत जानकारी के साथ, रिपोर्ट जमा करें. ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है.

गौरतलब है कि 12 अप्रैल को मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में स्कूल में बना खाना खाने के बाद सैकड़ों छात्र बीमार पड़ गए थे.

5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा, जिसका बारीपदा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट में इलाज चल रहा था, 14 अप्रैल को इलाज के दौरान ही चल बसी. इस घटना के बाद, Odisha Government ने एक जांच शुरू की और मृत छात्रा के परिवार के लिए 7 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की.

इस घटना के बाद स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है और फिलहाल राजस्व संभागीय आयुक्त स्तर की जांच चल रही है.

इस घटना ने आदिवासी छात्रों के आश्रम स्कूलों में खाने की क्वालिटी और सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी मामले पर खुद संज्ञान लिया है और रिपोर्ट मांगी है. उम्मीद है कि कमीशन के नोटिस से जांच में और तेजी आएगी.

विपक्षी दल बीजू जनता दल ने Monday को आरोप लगाया कि सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को तुरंत जवाब देने का निर्देश दिया गया है.

पीएसके

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