
Mumbai , 3 जनवरी . हिंदी सिनेमा में कई कलाकार ऐसे हुए, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी. ऐसी ही एक दमदार Actress थीं निरूपा रॉय, जिन्हें ‘Bollywood की मां’ भी कहा जाता है. उनकी मां की भूमिकाएं इतनी जीवंत होती थीं कि दर्शक उन्हें असली मां मान बैठते थे. वह सिर्फ भूमिका को ही नहीं बल्कि हर एक किरदार में जान डाल देती थीं. दर्शक उसे सच ही मान बैठते थे.
उनकी एक्टिंग की सच्चाई का एक मजेदार किस्सा साल 1953 में आई फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ से जुड़ा है. Actress निरूपा रॉय ने खुद मजेदार किस्सा इंटरव्यू में सुनाया था. उन्होंने बताया, “फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ की शूटिंग कोलकाता में हो रही थी. मुझे और बलराज को पति-पत्नी का रोल निभाना था. निर्देशक बिमल रॉय ने हमें बताया कि टैक्सी में कैमरा लगा रहेगा और आपको रास्ता पार करना है. सीन में कैमरा टैक्सी में छिपा था. बिमल रॉय के इशारे पर हम दोनों को ट्राम के पास से सड़क पार करनी थी. जैसे ही हम पार कर रहे थे, बलराज साहनी को हल्की चोट लग गई.”
निरूपा रॉय ने हंसते हुए कहा, “यह देखकर वहां खड़ी भीड़ गुस्सा हो गई और हम दोनों को बुरा-भला कहने लगी कि ऐसे लोग कहां से आ जाते हैं. अब हम उन्हें कैसे बताते कि हम एक्टिंग कर रहे हैं और वह इतनी सच्ची लग रही कि लोग समझ ही नहीं सके कि यह केवल एक्टिंग है, फिल्म का सीन है?”
निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को Gujarat के वलसाड में हुआ था. उनका असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बालसराफ था. कम उम्र में ही उनकी शादी कमल रॉय से हो गई. पति Mumbai में फिल्मों में किस्मत आजमाना चाहते थे, फिर क्या? दोनों ने Mumbai की राह पकड़ ली. कमल तो सफल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने पत्नी को मौका दिलाने का फैसला किया. दोनों ने Gujaratी फिल्म ‘रणकदेवी’ (1946) के लिए ऑडिशन दिया. कमल रिजेक्ट हो गए, लेकिन निरूपा को मुख्य भूमिका मिल गई. यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ.
करियर के शुरुआती दौर में निरूपा रॉय ने पौराणिक और धार्मिक फिल्मों में काम किया. ‘हर हर महादेव’, ‘नागपंचमी’ और ‘रानी रूपमती’ जैसी फिल्मों में वे देवी के रोल में दिखीं. इसके बाद उन्होंने ‘दो बीघा जमीन’ में काम किया, जिसमें उनके अभिनय को सराहा गया, लेकिन उन्हें सबसे बड़ी पहचान साल 1975 की फिल्म ‘दीवार’ से मिली. इसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मां का रोल निभाया था. यह रोल इतना प्रभावशाली था कि इसके बाद वे Bollywood की ‘मां’ के रूप में लोकप्रिय हो गईं.
इसके बाद तो 1970-90 के दशक में वे कई फिल्मों में मां के किरदार में नजर आईं. उनके किरदारों में दर्द, त्याग और ममता की गहराई इतनी थी कि उन्हें ‘क्वीन ऑफ मिसरी’ भी कहा जाने लगा. निरूपा रॉय ने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.
13 अक्टूबर 2004 को निरूपा रॉय का निधन हो गया. आज भी उनकी भूमिकाएं भारतीय सिनेमा की मिसाल हैं.
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एमटी/डीकेपी