
नई दिल्ली, 26 मई . इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में राष्ट्र प्रथम नीति अनुसंधान एवं परिवर्तन फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) की ओर से Tuesday को सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया.
कार्यशाला में Lok Sabha, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के लगभग 80 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल संवाद, सुशासन और विकसित भारत-2047 से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई.
कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को नीति विशेषज्ञों के साथ संवाद का ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे बेहतर शासन व्यवस्था, प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत समन्वय और क्षेत्रीय स्तर पर परिणाम आधारित कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श कर सकें.
एनएफपीआरसी फाउंडेशन के अध्यक्ष तरुण चुघ ने स्वागत संबोधन में कहा कि आयुष्मान भारत, नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल संवाद जैसे परिवर्तनकारी प्रयास विकसित India की मजबूत आधारशिला बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनकेंद्रित शासन, प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित संवाद व्यवस्था को और मजबूत बनाना आवश्यक है.
Lok Sabha सांसद डॉ. सीएन मंजूनाथ ने ‘आयुष्मान भारत: India की स्वास्थ्य व्यवस्था की नई नींव’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि पीएम-जेएवाई और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है. उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की गांव-गांव तक पहुंच विकसित India की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
सत्र में डिजिटल हेल्थ सिस्टम, क्लेम प्रक्रिया, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य ढांचे के आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.
सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के सीनियर डायरेक्टर सौरभ चोपड़ा ने नई शिक्षा नीति-2020 को India की शिक्षा क्रांति का आधार बताते हुए कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक शिक्षा मॉडल देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा India को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
Lok Sabha सांसद डॉ. संबित पात्रा ने रणनीतिक डिजिटल संचार पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि social media और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं.
उन्होंने मीडिया सहभागिता, social media प्रबंधन, सूचना के त्वरित प्रसार और संकट की स्थिति में प्रभावी संवाद रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सक्रिय संवाद ही जनविश्वास को मजबूत बनाता है.
डॉ. पात्रा ने क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जनप्रतिनिधि जनता से अधिक गहराई से जुड़ सकते हैं.
कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूटीओ जिनेवा में India के स्थायी मिशन में काउंसलर एवं ‘ हाऊ इंडिया ब्रेबो द कोविड-19 पैंडेमिक’ पुस्तक के लेखक आशीष चंदोरकर का वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया गया.
उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में India ने कोविड-19 महामारी का सामना दृढ़ नेतृत्व, तकनीक आधारित प्रबंधन और जनभागीदारी के माध्यम से सफलतापूर्वक किया. उन्होंने कोविन प्लेटफॉर्म और दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में India की उपलब्धियों का उल्लेख किया.
कार्यक्रम के समापन पर एनएफपीआरसी फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य अभिनव प्रकाश ने सभी वक्ताओं और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि एनएफपीआरसी भविष्य में भी शोध आधारित संवाद, नीति विमर्श और जनप्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा.
कार्यशाला में शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने, डिजिटल सिस्टम को बेहतर करने और योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया. प्रतिभागियों ने ऐसे निष्पक्ष और शोध आधारित मंचों की सराहना की, जो जनप्रतिनिधियों को बेहतर निर्णय लेने और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं.
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एएसएच/डीकेपी