
अगरतला, 23 अप्रैल . त्रिपुरा विधानसभा का एक विशेष सत्र 30 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और इस पर एक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा. यह जानकारी राज्य Government के अधिकारियों ने Thursday को दी.
विधानसभा सचिव अमिया कांति नाथ ने बताया कि त्रिपुरा विधानसभा का 13वीं विधानसभा का 9वां सत्र, जिसे पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, अब 30 अप्रैल को फिर से शुरू होगा. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष रामपदा जमातिया ने सदन की दूसरी चरण की बैठक उसी दिन बुलाने का निर्णय लिया है.
नाथ के अनुसार, यह सत्र 13 मार्च को शुरू हुआ था और 23 मार्च को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था.
संसदीय कार्य एवं बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने बताया कि 30 अप्रैल को महिला आरक्षण मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के बाद विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासित अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी तरह के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे और वहां भी इस विषय पर प्रस्ताव पारित होने की संभावना है.
यह विशेष सत्र उस समय हो रहा है जब हाल ही में संसद में 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पारित नहीं हो सका था. यह विधेयक Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में 2029 तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित है.
संसद में विधेयक पारित न होने के बाद भाजपा ने देश के विभिन्न हिस्सों में “जन आक्रोश पदयात्रा” शुरू की है और कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, Samajwadi Party, वाम दलों सहित विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया है.
त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने 17 अप्रैल को “भारतीय लोकतंत्र का काला दिन” बताते हुए कहा कि विपक्ष का रुख महिलाओं के प्रति उसकी सोच को उजागर करता है.
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का पारित न होना विपक्ष के “महिला विरोधी मानसिकता” को दर्शाता है और यह लोकतंत्र के लिए एक “दुखद अध्याय” है.
Chief Minister ने यह भी दावा किया कि विपक्ष के इस रुख का Political परिणाम भुगतना पड़ेगा और आने वाले चुनावों में महिलाएं इसका जवाब देंगी.
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डीएससी