
Mumbai , 18 जून . शिवसेना नेता संजय निरुपम ने Thursday को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, शिवसेना (यूबीटी) और Samajwadi Party को लेकर तीखे बयान दिए. एक तरफ उन्होंने केंद्र की एनडीए Government और Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना की. वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी दलों पर युवाओं को भड़काने, भ्रम फैलाने और Political अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट में चल रही कथित अंदरूनी कलह और Samajwadi Party में संभावित टूट को लेकर भी बड़ा दावा किया.
संजय निरुपम ने कोटा में राहुल गांधी के छात्रों के साथ हालिया संवाद कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित और स्क्रिप्टेड कार्यक्रम था. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नीट और सीबीएसई जैसे मुद्दों के बहाने देश के युवाओं को Government के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहे हैं. निरुपम ने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य युवाओं में असंतोष पैदा कर देश में अराजकता का माहौल बनाना है, लेकिन India की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि India का युवा राष्ट्रवादी सोच रखता है और देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अव्यवस्था फैलाने की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगा.
उन्होंने कहा कि India की तुलना नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसे देशों से नहीं की जा सकती, क्योंकि यहां लोकतांत्रिक मूल्य समाज की जड़ों तक जुड़े हुए हैं. उनके अनुसार, राहुल गांधी यदि अपनी Political असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें एक और Political असफलता का सामना करना पड़ेगा.
शिवसेना (यूबीटी) में चल रही कथित नाराजगी और सांसदों के असंतोष को लेकर भी संजय निरुपम ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह खबर सामने आ रही थी कि पार्टी के नौ Lok Sabha सांसदों में से छह सांसद अलग समूह बनाना चाहते हैं और इस संबंध में Lok Sabha अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया है. इस खबर की पुष्टि उस समय हुई जब उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में कथित तौर पर छह सांसद शामिल नहीं हुए. उन्होंने इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बताया.
उद्धव ठाकरे गुट द्वारा बैठक के लिए व्हिप जारी किए जाने पर भी निरुपम ने सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि भारतीय संसदीय व्यवस्था में व्हिप का उपयोग संसद या विधानसभा के भीतर होने वाली विधायी गतिविधियों के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि किसी विधेयक, प्रस्ताव या मतदान के दौरान सांसदों और विधायकों को निर्देश देने के लिए व्हिप जारी किया जाता है. लेकिन संसद या विधानसभा के बाहर होने वाली बैठकों के लिए व्हिप जारी करने का कोई कानूनी आधार नहीं है. निरुपम ने दावा किया कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व को गलत सलाह दी गई और इससे पार्टी की सार्वजनिक रूप से किरकिरी हुई है. उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों की सही समझ के अभाव में यह फैसला लिया गया.
संजय निरुपम ने कहा कि वर्तमान समय में देशभर के Political कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों के बीच एनडीए Government और Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कामकाज से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता और जनप्रतिनिधि एनडीए की ओर रुख कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रीय दलों के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि भविष्य में वे एनडीए के साथ आ सकते हैं. निरुपम ने कहा कि Political कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच यह भावना बन रही है कि विकास और स्थिरता के लिए एनडीए सबसे मजबूत विकल्प है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि Samajwadi Party में भी बड़े पैमाने पर असंतोष और बगावत की स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य के हालिया दावों का हवाला देते हुए कहा कि यदि Samajwadi Party के सांसद बड़ी संख्या में अलग समूह बनाकर एनडीए का समर्थन करें तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
निरुपम ने दावा किया कि देश में जो Political माहौल बन रहा है, उसमें कई क्षेत्रीय दलों के सांसद अपने नेतृत्व से असंतुष्ट होकर नए Political विकल्प तलाश सकते हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों के शीर्ष नेता भले अपनी Political जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन उनके सांसदों और कार्यकर्ताओं के बीच अलग तरह की सोच विकसित हो रही है. उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल लगातार कमजोर हो रहे हैं, जबकि एनडीए का प्रभाव और Political स्वीकार्यता बढ़ रही है.
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पीएसके