
तिरुवनंतपुरम, 30 मई . Enforcement Directorate (ईडी) के अधिकारियों पर हमले के चर्चित मामले में आरोपियों को Saturday को बड़ा झटका लगा, जब तिरुवनंतपुरम की अदालत ने गिरफ्तार किए गए पहले पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं.
न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत, तिरुवनंतपुरम, ने निधिन राज, मनोज, जीवन, श्रीजीत और शाहीन की ओर से दायर जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर हमला गंभीर अपराध है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.
आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, Governmentी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी कानून (पीडीपीपी अधिनियम) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जांच अभी शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण में है. ऐसे में आरोपियों को जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है.
वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं जांच के दौरान टिक नहीं पाएंगी. हालांकि अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया.
इस बीच शहर Police ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है. Thursday रात पूर्व अट्टुकल पार्षद उन्नीकृष्णन समेत छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 25 हो गई है.
Police सूत्रों के मुताबिक मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. जांच एजेंसियां हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनकी तलाश कर रही हैं. शहर के Police आयुक्त ने कहा कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और कई संदिग्धों को निगरानी में रखा गया है.
मामले के Political और कानूनी रूप से संवेदनशील होने के बीच गृह मंत्री रमेश चेन्नितला ने Police महानिदेशक (डीजीपी) को आरोपपत्र जल्द दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य उच्च अदालतों में आरोपियों द्वारा राहत मांगे जाने से पहले अभियोजन पक्ष की स्थिति को मजबूत करना है.
गौरतलब है कि ईडी अधिकारियों पर हुए इस हमले ने राज्य में व्यापक Political बहस छेड़ दी है. अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किया जाना इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के लिए पहला बड़ा न्यायिक झटका माना जा रहा है.
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डीएससी