शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा-सरकारी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश

Mumbai , 4 मई . शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने Monday को Maharashtra की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य Government पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ केंद्र Government ने देशभर में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी सायरन टेस्ट करके लोगों को आपदा की चेतावनी देने की कोशिश की, वहीं Maharashtra में जब महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ रोजाना बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं, तो Governmentी मशीनरी का ‘सायरन’ खामोश है.

दरअसल, शिवसेना गुट के मुखपत्र ‘सामना’ में Monday को छपे एक संपादकीय में पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में चार साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की घटना का जिक्र किया गया है. इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में भारी गुस्सा फैल गया. गुस्साए लोग बच्ची का शव सड़क पर लेकर आए और आरोपी को तुरंत उनके हवाले करने की मांग करने लगे ताकि वे खुद न्याय कर सकें, लेकिन इसके बजाय Police ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया.

लेख में कहा गया है कि Chief Minister फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ टनल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान लगे ट्रैफिक जाम के लिए जनता से माफी मांगी. नसरापुर, चाकन और नागपुर में छोटी बच्चियों के साथ हुए अमानवीय यौन अत्याचार गृह विभाग की विफलता को दर्शाते हैं. इसलिए Chief Minister को राज्य की सभी छोटी बच्चियों और उनकी माताओं से माफी मांगनी चाहिए.

संपादकीय में कहा गया है कि भोर तालुका के नसरापुर गांव में, चार साल की एक बच्ची से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई. पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से तेजी से बढ़ रही हैं. यहां तक ​​कि Chief Minister के अपने शहर नागपुर में भी अत्याचार का शिकार हुई महिलाओं की दिल दहला देने वाली चीखें सुनी जा सकती हैं. सांगली में भी इसी तरह के अत्याचार के मामले सामने आए हैं. महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को लेकर Government निष्क्रिय बनी हुई है और अपराधियों को अब कानून का कोई डर नहीं रहा.

आरोप लगाया गया है कि Chief Minister फडणवीस राज्य के गृह मंत्री के तौर पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं. वह राज्य की कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय दूसरे राज्यों में Political प्रचार में व्यस्त रहे. इसमें पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु के दौरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि Maharashtra की छवि चमकाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है. राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ रहे हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है.

लेख में भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में भाजपा ने जोरदार विरोध किया था, तब Maharashtra में हो रही घटनाओं पर वे राजनीति न करने की सलाह दे रहे हैं यानी जहां विपक्ष शासित राज्य होता है, वहां विरोध तेज होता है, लेकिन अपने राज्य में ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध ली जाती है.

संपादकीय में यह भी सवाल उठाया गया है कि Government बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की सजा की बात करती है, लेकिन वास्तव में कितने दोषियों को सजा मिली है. जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि सिर्फ बयानबाजी से क्या बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?

लेख में Government की ‘लड़की बहन योजना’ पर भी तंज कसा गया है, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता दी जाती है. सवाल उठाया गया है कि क्या सिर्फ 1,500 रुपए देने से Government को उन महिलाओं की बेटियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का लाइसेंस मिल जाता है?”

संपादकीय में कहा गया है कि अगर किसी को इन घटनाओं का असली जिम्मेदार ठहराना हो तो वह गृह विभाग और राज्य Government की व्यवस्था है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है.

लेख के अनुसार यह सिर्फ Political मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवता और महिलाओं की गरिमा का सवाल है. Government से मांग की गई है कि वह सिर्फ ट्रैफिक या प्रशासनिक मुद्दों पर माफी मांगने के बजाय Maharashtra की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में असफल रहने के लिए सार्वजनिक माफी मांगे.

पीआईएम/वीसी

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