शाला प्रवेशोत्सव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह विरासत जो आज ‘प्रगति का प्रवेशोत्सव’ बन गई

Ahmedabad, 23 जून . Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने कहा कि इतिहास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अक्सर उन क्षणों में रचा जाता है जिन्हें उस वक्त कोई असाधारण नहीं समझता. एक बच्चे का पहली बार विद्यालय में प्रवेश भी देखने में एक साधारण सी गतिविधि लगती है, किंतु जो आंखें थोड़ा गहरा देखती हैं, वे जानती हैं कि उस एक कदम में कितनी पीढ़ियों का भाग्य समाया होता है. वह द्वार केवल एक बच्चे के लिए नहीं खुलता बल्कि उसके साथ उस परिवार की संभावनाएं खुलती हैं, उस समाज की आकांक्षाएं खुलती हैं और आने वाले कल की अनगिनत संभावनाएं भी उस क्षण जन्म लेती हैं.

यही कारण है कि जब हम Gujarat के तत्कालीन Chief Minister एवं हमारे वर्तमान Prime Minister Narendra Modi की दूरदृष्टि से प्रारंभ हुए शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथयात्रा के 23 वर्षों के इस गौरवशाली सफर पर दृष्टिपात करते हैं तो यह किसी Government के अभियान की सफल-गाथा मात्र नहीं लगती बल्कि यह उस सामाजिक रूपांतरण की कहानी प्रतीत होती है जिसने Gujarat की कई पीढ़ियों के जीवन को नई दिशा और नई धुरी प्रदान की है.

सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि वर्ष 2003 में जब तत्कालीन Chief Minister और वर्तमान में देश के Prime Minister मोदी ने इस अभियान की नींव रखी, तब राज्य अनेक सामाजिक और विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा था. शिक्षा का क्षेत्र भी उन महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक था. वर्ष 2001-02 में विद्यालय छोड़ने की दर 37 प्रतिशत से अधिक थी अर्थात लगभग हर तीसरा बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो जाता था. अनेक परिवार शिक्षा की उपयोगिता को लेकर अभी भी संशय में थे और बेटियों की शिक्षा सामाजिक एवं आर्थिक बाधाओं के बोझ तले और भी अधिक प्रभावित थी.

ऐसे समय में हमारे जननेता Narendra Modi ने शाला प्रवेशोत्सव के रूप में एक ऐसा विचार सामने रखा, जो सुनने में भले ही सरल था, लेकिन उसके परिणाम आगे चलकर अत्यंत क्रांतिकारी सिद्ध हुए. ‘शिक्षा केवल Government का विषय नहीं बल्कि समाज का संकल्प बनना चाहिए.’ यह पीएम Narendra Modi का वही विचार था जिसने इस अभियान को एक प्रशासनिक कार्यक्रम से ऊपर उठाकर जन-अभियान का स्वरूप दिया. शाला प्रवेशोत्सव की सबसे विशिष्ट और अनुकरणीय विशेषता यह रही कि इसने शासन और समाज के बीच की दूरी को मिटा दिया.

Chief Minister से लेकर मंत्रियों तक, विधायकों से लेकर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों तक सभी गांव-गांव पहुंचे, परिवारों से मिले और बच्चों का हाथ थामकर उन्हें विद्यालय के द्वार तक ले गए. और पिछले 23 वर्षों से यह परंपरा निर्बाध जारी है.

किसी भी विचार की वास्तविक शक्ति उसके शब्दों में नहीं बल्कि उसके परिणामों में दिखाई देती है. पिछले 23 वर्षों में शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथयात्रा ने भी अपनी सार्थकता को इसी कसौटी पर सिद्ध किया है. इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल विद्यालयों तक बच्चों की बढ़ती पहुंच नहीं है, बल्कि उन लाखों जीवनों में आया वह सकारात्मक परिवर्तन है, जिसे शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथयात्रा के माध्यम से शिक्षा ने संभव बनाया है.

वर्ष 2003 में तत्कालीन Chief Minister के रूप में Narendra Modi की प्रेरणा से जिन बच्चों ने पहली बार विद्यालय का द्वार पार किया था, आज उनमें से कोई डॉक्टर है, कोई इंजीनियर, कोई शिक्षक है तो कोई सफल उद्यमी; लेकिन इन सब की साझा पहचान यह है कि Narendra Modi की दूरदर्शी सोच और शाला प्रवेशोत्सव-कन्या केलवणी रथयात्रा जैसे प्रयासों ने उन्हें शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान किया.

किसी समाज में सबसे गहरा और स्थायी परिवर्तन तब आता है जब उसकी बेटियां आगे बढ़ती हैं. यही कारण है कि पीएम मोदी ने प्रारंभिक दौर में ही यह समझ लिया था कि Gujarat के भविष्य को सशक्त बनाना है तो बेटियों की शिक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा. इसी सोच के साथ कन्या केलवणी रथयात्रा को शाला प्रवेशोत्सव का एक अविभाज्य अंग बनाया गया. पिछले दो दशकों में Gujarat में बेटियों की शिक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में जो रूपांतरण आया है, वह केवल Governmentी प्रयासों का नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना के जागरण का प्रमाण है. आज अभिभावक बेटियों को केवल विद्यालय ही भेजना नहीं चाहते, बल्कि वे उन्हें उच्च शिक्षा की ऊँचाइयों तक पहुँचते हुए भी देखना चाहते हैं.

Prime Minister मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए इस सामाजिक परिवर्तन के संकल्प को और सुदृढ़ करने के लिए राज्य Government ने नमो लक्ष्मी योजना प्रारंभ की है, जिसके अंतर्गत कक्षा 9 से 12 तक की बेटियों को 50,000 रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. साथ ही, विज्ञान विषय में अध्ययनरत छात्रों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत कक्षा 11 और 12 में विज्ञान संकाय में अध्ययन के इच्छुक विद्यार्थियों को दो वर्षों के दौरान 25,000 रुपए तक की सहायता प्रदान की जाती है, क्योंकि हमारा संकल्प है कि आर्थिक परिस्थितियां अब किसी भी बच्चे की प्रतिभा और उसके सपनों की उड़ान में बाधा न बन सकें.

शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का विद्यालय में केवल नामांकन सुनिश्चित करना नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक सार्थकता तब सिद्ध होती है जब बच्चा विद्यालय में रहते हुए सीखने की जिज्ञासा, सोचने की स्वतंत्रता और अपने भीतर निहित संभावनाओं को पहचानने की दृष्टि विकसित कर सके. इसी सोच के साथ वर्ष 2009 में तत्कालीन Chief Minister के रूप में Narendra Modi के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ गुणोत्सव आज गुणोत्सव 2.0 (जीएसक्यूएसी) के रूप में विकसित हो चुका है और विद्यालयों में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन की एक सुदृढ़ परंपरा स्थापित कर चुका है.

इसी क्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एश्योरेंस फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) के अंतर्गत विद्यालयों की गुणवत्ता के मूल्यांकन हेतु 211 मानक निर्धारित किए गए हैं, जो बच्चों के समग्र विकास, सीखने की गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.

इतना ही नहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप Gujarat ने 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 शैक्षणिक संरचना भी लागू कर दी है और बालवाटिका का सार्वभौमिक क्रियान्वयन भी हो रहा है. वहीं, आधुनिक तकनीक ने भी इस यात्रा में एक शक्तिशाली भूमिका निभाई है. डिजिटल रूप से उपलब्ध जन्म पंजीकरण प्रणाली और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के एकीकरण से प्रत्येक बच्चे तक पहुंच और उसकी सतत निगरानी सुनिश्चित हो रही है.

इसके साथ ही, Gujarat का विद्या समीक्षा केंद्र, जो India की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित शैक्षणिक निगरानी व्यवस्था है, पूरी शिक्षा प्रणाली की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है. इसी व्यवस्था के अंतर्गत एआई आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम संभावित ड्रॉपआउट होने वाले बच्चों की पूर्व-पहचान कर समय रहते आवश्यक मार्गदर्शन को भी सुनिश्चित कर रहा है. इस तरह से राज्य Government के ये प्रयास दर्शाते हैं कि हमने शाला प्रवेशोत्सव की मूल भावना को आधुनिक युग में एक नई प्रासंगिकता दी है.

किसी भी अभियान की सच्ची ताकत तब सिद्ध होती है जब समाज स्वयं उसका भागीदार बन जाए. पिछले 23 वर्षों में जनता और विभिन्न संस्थाओं द्वारा विद्यालयों को लगभग 326 करोड़ रुपए का योगदान प्राप्त हुआ है. इसी तरह, विद्यालय प्रबंधन समितियों में 75 प्रतिशत अभिभावकों की भागीदारी और 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व ने शिक्षा को वास्तव में एक सामुदायिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. इतना ही नहीं, Gujarat Government की Chief Minister ज्ञान साधना और ज्ञान सेतु मेरिट स्कॉलरशिप जैसी योजनाएं आज उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं, जो प्रतिभा तो रखते हैं किंतु संसाधनों की कमी से सपनों को विराम देने पर विवश हो सकते थे.

हमारे Prime Minister Narendra Modi ने एक बार कहा था, “यदि हमें विकसित India का निर्माण करना है तो हमें अपने बच्चों के सपनों को शक्ति देनी होगी.” शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथयात्रा की 23 वर्षों की यह यात्रा उसी विचार का सबसे सजीव और प्रामाणिक साक्ष्य है. एक बीज बोने वाला जानता है कि वह उसकी छांव में नहीं बैठेगा, फिर भी वह उसे पूरे विश्वास के साथ धरती में रोपता है. शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथयात्रा Prime Minister Narendra Modi द्वारा बोया गया ऐसा ही एक दूरदर्शी बीज है, जो आज शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक जागरण के एक विशाल वटवृक्ष के रूप में हमारे सामने खड़ा है, जिसकी छाया में Gujarat की नई पीढ़ियाँ अपने सपनों को आकार दे रही हैं.

समय बीतता है, नेतृत्व बदलते हैं, और योजनाएं भी बदलती हैं, लेकिन कुछ विचार ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों की नियति का हिस्सा बन जाते हैं. यह पहल उसी विचार की जीवंत अभिव्यक्ति है जिसने लाखों बच्चों को अवसर, लाखों बेटियों को आत्मविश्वास और पूरे समाज को एक नई दिशा प्रदान की है. भविष्य की पीढ़ियां जब Gujarat की विकास यात्रा का इतिहास लिखेंगी, तो प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में Prime Minister Narendra Modi के ये प्रयास हमेशा सामाजिक क्रांति के रूप में स्मरण किए जाएंगे.

डीकेपी/

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