
Mumbai , 22 जून . शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने Pakistan के रक्षा मंत्री के हालिया बयान, Rajasthan में अवैध धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के जम्मू-कश्मीर संबंधी बयान और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के दल-बदल की अटकलों को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि India की सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को लेकर उनकी पार्टी का रुख पूरी तरह स्पष्ट है.
Pakistan के रक्षा मंत्री के India विरोधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निरुपम ने कहा कि India को धमकी देने और युद्ध की बातें करने वाले Pakistanी मंत्री होश में नहीं लगते. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि या तो ऐसे बयान सपनों में सोचे गए हैं या फिर नशे की हालत में दिए गए हैं. Pakistan India के खिलाफ युद्ध करने की स्थिति में नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाकर 22 लोगों की हत्या की गई थी, के बाद Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में India ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया. यह एक अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और Pakistan के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया.
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के बाद Pakistan अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संघर्ष रोकने की गुहार लगाने लगा. ऐसा देश यदि India को युद्ध की धमकी देता है तो यह बेहद हास्यास्पद प्रतीत होता है. सिंधु नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि India का रुख स्पष्ट है. जब तक Pakistan आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई India विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों की मदद करना नहीं छोड़ती, तब तक Pakistan को पानी देने का सवाल नहीं उठता.
Rajasthan में मस्जिदों और दरगाहों को गिराने की कार्रवाई रोकने की असदुद्दीन ओवैसी की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए निरुपम ने कहा कि Pakistan सीमा से सटे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध धार्मिक ढांचे बनाए गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इन ढांचों की आड़ में आतंकवादियों को पनाह देने और India विरोधी गतिविधियों को समर्थन देने का काम किया जा रहा था. राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए India और Rajasthan Government ने सोच-समझकर यह कदम उठाया है.
निरुपम ने कहा कि एआईएमआईएम और ओवैसी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी के लिए देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से जुड़ा हो, राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए निरुपम ने कहा कि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच वैचारिक दूरी बढ़ती जा रही है. थरूर मुद्दों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं, जबकि कांग्रेस के कई नेता Government की उपलब्धियों को स्वीकार करने से बचते हैं. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौट रही है. उन्होंने दावा किया कि पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है, आतंकवाद का प्रभाव पहले की तुलना में घटा है और क्षेत्र तेजी से देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और इसमें समय लगेगा, लेकिन सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. एक अनुभवी और समझदार नेता होने के नाते शशि थरूर ने इस बदलाव को समझा और इसे मोदी Government की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा.
शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिवसेना में शामिल होने की खबरों पर निरुपम ने कहा कि यह यूबीटी गुट के अंत की शुरुआत है. एकनाथ शिंदे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अब तक लोगों ने केवल ट्रेलर देखा है और पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है. यूबीटी खेमे में व्यापक असंतोष और विद्रोह की स्थिति है तथा कई विधायक, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं.
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को असली शिवसेना बताया था. निरुपम ने कहा कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा का पालन कर रही है, जबकि यूबीटी गुट ने 2019 के बाद उस विचारधारा से समझौता किया, जिसके कारण उसके नेता और कार्यकर्ता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं.
उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, हिंदुत्व की विचारधारा और बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांत सर्वोपरि हैं तथा इन्हीं मुद्दों के आधार पर शिवसेना आगे बढ़ रही है.
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पीएसके/एबीएम