
रांची, 30 मार्च . Enforcement Directorate (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय ने Jharkhand के साहिबगंज में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और खनिजों के बिना चालान परिवहन से जुड़े मामले में कड़ी कार्रवाई की. कार्रवाई के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रांची के समक्ष अभियोजन शिकायत दायर की है.
यह शिकायत धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत दर्ज की गई है, जिसमें सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित उसके निदेशकों और संबंधित कंपनियों को आरोपी बनाया गया है. ईडी ने इस मामले में अपराध से अर्जित लगभग 5.39 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने की मांग की है.
ईडी की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक First Information Report के आधार पर शुरू हुई थी. यह First Information Report बिहार के भागलपुर स्थित पीरपैंती रेलवे साइडिंग के अज्ञात रेलवे अधिकारियों और सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई थी. इसके अलावा, बिहार और Jharkhand में दर्ज तीन अन्य मूल First Information Report को भी इस जांच में शामिल किया गया.
जांच में सामने आया कि सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके निदेशक वर्ष 2015 से Jharkhand के साहिबगंज जिले के मौजा जोकमारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और परिवहन में संलिप्त थे.
आरोप है कि कंपनी ने पीरपैंती रेलवे साइडिंग के माध्यम से अनिवार्य जेआईएमएमएस चालान के बिना 251 रेलवे रेक भेजे, जिससे Government को भारी राजस्व का नुकसान हुआ. इसमें करीब 11.29 करोड़ रुपये के स्टोन चिप्स और 5.94 करोड़ रुपये के बोल्डर की रॉयल्टी चोरी शामिल है. जांच में यह भी पाया गया कि इस अवैध गतिविधि को सुचारु रूप से चलाने के लिए रेलवे अधिकारियों और अन्य Governmentी कर्मचारियों को रिश्वत दी गई थी.
ईडी के अनुसार, अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने फर्जी कंपनियों और इनवॉइस का सहारा लिया. इनमें डीएस बिटुमिक्स और करण इंटरनेशनल जैसी गैर-मौजूद फर्मों के नाम पर करीब 4.87 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, ताकि इस राशि को ‘साफ’ संपत्ति के रूप में दर्शाया जा सके.
जांच के दौरान 24 अक्टूबर 2024 को ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साहिबगंज स्थित परिसर पर छापेमारी की, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए. जब्त सामग्री को अपने कब्जे में रखने के लिए दायर आवेदन को पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण ने 4 अप्रैल 2025 को मंजूरी दे दी. इसके अलावा, कंपनी के निदेशकों, रेलवे अधिकारियों और साहिबगंज के जिला खनन अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए हैं.
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एएसएच/डीएससी