राऊज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा विधायक को सुनाई चार साल की सजा, बिहार विधानसभा की सदस्यता रद्द होने का खतरा

Patna, 4 जुलाई . बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू सिंह को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 2018 में नए साल की पूर्व संध्या पर हुई जश्न में गोलीबारी की एक जानलेवा घटना के मामले में चार साल की सजा सुनाई है.

अदालत ने राजू सिंह को गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत अपराधों का दोषी ठहराया. हालांकि अदालत ने इसी मामले में उनकी पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य आरोपियों-राणा सिंह और रामेंद्र सिंह को बरी कर दिया.

इस सजा का विधायक पर तुरंत Political असर पड़ने की उम्मीद है. ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 8(3) के तहत, अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे ज्यादा की जेल की सजा होती है, तो वह दोषी ठहराए जाने की तारीख से अयोग्य हो जाता है, जब तक कि कोई सक्षम अदालत कानून के अनुसार राहत न दे.

चूंकि सिंह को चार साल की जेल की सजा सुनाई गई है, इसलिए इस अधिनियम के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है, जिससे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार साहिबगंज विधानसभा सीट खाली हो जाएगी.

यह मामला 31 दिसंबर, 2018 की रात की एक घटना से जुड़ा है, जब नए साल के जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग हुई थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक गोली आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और इलाज के दौरान 3 जनवरी, 2019 को उनकी मौत हो गई.

राजू सिंह राजपूत समुदाय से हैं और अपने करियर के दौरान कई Political दलों के जरिए साहिबगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वह 2005 में पहली बार लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के टिकट पर बिहार विधानसभा पहुंचे थे. 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, वह विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) में शामिल हो गए और अपनी सीट बरकरार रखी.

2022 में, सिंह ने वीआईपी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, जिसके बाद उन्हें बिहार Government में मंत्री बनाया गया. बाद में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर साहिबगंज से 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव जीता.

यह भाजपा नेता के लिए एक बड़ा Political झटका है और फैसले के खिलाफ अपील समेत आगे की कानूनी गतिविधियां ही इस मामले की भविष्य की दिशा तय करेंगी.

एससीएच/वीसी

Leave a Comment