
New Delhi, 26 जून . भारतीय वायुसेना में लगातार कम हो रहे फाइटर स्क्वाड्रनों की भरपाई स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान से की जानी है. अब तक वायुसेना को तेजस मार्क-1 के 38 विमान मिल चुके हैं, लेकिन तेजस मार्क-1ए का एक भी विमान अभी तक डिलीवर नहीं हुआ है.
भारतीय वायुसेना ने एचएएल के साथ कुल 180 एलसीए तेजस मार्क-1ए विमानों की खरीद का करार किया है. हालांकि, एचएएल अब तक कई बार तय समय-सीमा चूक चुकी है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, तेजस मार्क-1A कार्यक्रम की प्रोग्रेस रिपोर्ट को लेकर एचएएल सितंबर में भारतीय वायुसेना के सामने रिव्यू के लिए आ सकती है.
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह प्रोग्रेस रिपोर्ट पहले अप्रैल में पेश की जानी थी, लेकिन इसे मई तक टाल दिया गया. इसके बाद जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एचएएल की अलग अलग प्रोजेक्ट की समीक्षा की, जिसमें तेजस कार्यक्रम भी शामिल था. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, एचएएल ने अब सितंबर में तेजस मार्क-1ए की प्रोग्रेस रिपोर्ट के साथ फिर से आने की बात कही है.
एचएएल के पूर्व सीएमडी डॉ. डीके सुनील पहले ही साफ कर चुके हैं कि पिछले साल दिसंबर में वायुसेना के साथ हुई समीक्षा बैठक में बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार इंटीग्रेशन का काम पूरा होने की जानकारी दी गई थी. हालांकि, रडार की परफॉर्मेंस में सुधार समेत कुछ अन्य तकनीकी पहलुओं पर काम बाकी था.
अगर सितंबर में प्रस्तावित समीक्षा बैठक तक रडार की परफॉर्मेंस सहित बाकी तकनीकी खामियों को दूर कर लिया जाता है और भारतीय वायुसेना इन सुधारों को स्वीकार कर लेती है, तो तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी की तारीखों पर से भी पर्दा उठ सकता है.
तेजस प्रोग्राम की रफ्तार धीमी रही है, जिसकी एक बड़ी वजह इंजन की डिलीवरी में हुई देरी भी है. हालांकि, अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं. एचएएल के पास फिलहाल छह इंजन उपलब्ध हैं. छठा इंजन मई में डिलीवर हुआ था.लेकिन उसमें कुछ खामी पाई गई थी.
किसी भी नए प्रोडक्ट की डिलीवरी के बाद उसकी अनिवार्य तकनीकी जांच की जाती है. अगर जांच के दौरान कोई समस्या सामने आती है या कोई पैरामीटर तय मानकों के अनुरूप नहीं होता, तो इसकी जानकारी संबंधित वेंडर को दी जाती है. सूत्रों के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत एचएएल के इंजीनियरों ने डीलिवर किए छठे इंजन की जांच की थी. जांच के दौरान कुछ तकनीकी खामियां सामने आईं, जिनकी जानकारी नियमानुसार अमेरिकी कंपनी जीई को दी गई. सूत्रों के मुताबिक जीई ने उन कमियों को दूर कर दिया.
तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम के लिए इंजन की आपूर्ति का समझौता अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) के साथ साल 2021 में हुआ था. इस करार के तहत India को कुल 99 एफ404 इंजन मिलने हैं. नवंबर 2025 में अतिरिक्त 97 तेजस मार्क 1ए के लिए 113 इंजन की डील भी हो चुकी है.
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. अब रक्षा मंत्रालय इस देरी के लिए एचएएल पर पेनल्टी लगाने की तैयारी कर रहा है. रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी इसकी पुष्टि भी कर चुके हैं. वहीं, इंजन की डीलिवरी में देरी को लेकर एचएएल भी अमेरिकी कंपनी जीई पर पेनल्टी लगाने की बात कह चुकी है.
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को उम्मीद है कि इस साल तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी शुरू हो सकती है. एचएएल के पास फिलहाल छह इंजन उपलब्ध हैं और करीब 18 विमानों के स्ट्रक्चर तैयार हैं. साल के अंत तक लगभग 24 विमान तैयार होने की उम्मीद है. हालांकि, भारतीय वायुसेना को अब तक तेजस मार्क-1ए का एक भी विमान नहीं मिला है.
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एमएस/