
New Delhi, 20 अप्रैल . करीब 23 साल पुराने एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व Chief Minister अजित जोगी के बेटे अमित जोगी की याचिका पर Supreme Court अब 23 अप्रैल को सुनवाई करेगा.
दरअसल, रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी ठहराए जाने के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए Supreme Court में अपील दाखिल की गई है. Supreme Court में दायर याचिका में अमित जोगी ने दलील दी है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना ही सीबीआई की दलील पर 40 मिनट में फैसला सुना दिया.
गौरतलब है साल 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता राम अवतार जग्गी की बिलासपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. जग्गी उस समय विद्याचरण शुक्ला के करीबी और पार्टी के कोषाध्यक्ष थे. बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन Chief Minister अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर आरोप लगाया था. जग्गी मर्डर केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टरमाइंड बताते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद साल 2004 से 2007 तक निचली अदालत में चले केस के बाद साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी थी लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.
इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने Supreme Court में चुनौती दी. Supreme Court ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया था. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 23 साल पुराने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था.
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी करने के निर्णय को पूर्णतः अवैध, गलत और साक्ष्यों के प्रतिकूल करार देते हुए कहा था कि जिस साक्ष्य के आधार पर अन्य आरोपियों को साजिश का दोषी ठहराया गया, वही साक्ष्य अमित जोगी के मामले में बिना ठोस कारण खारिज कर दिए गए. उच्च न्यायालय ने पाया कि पूरी साजिश के मास्टरमाइंड अमित जोगी थे, जो तत्कालीन Chief Minister के पुत्र होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे और Police मशीनरी पर असर रखते थे. अदालत ने कहा कि इतनी बड़े स्तर की Political साजिश, हमलावरों की व्यवस्था, भागने के रास्ते, फर्जी आरोपियों की प्लांटिंग और प्रारंभिक जांच भटकाने जैसा संगठित अपराध किसी बड़े नेतृत्व और संरक्षण के बिना संभव नहीं था. उच्च न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने Supreme Court में याचिका दायर की है.
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