
jaipur, 1 मई . Rajasthan हाईकोर्ट ने Friday को 2008 jaipur के सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़े दो दोषियों को राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी.
मोहम्मद सरवर आजमी और शहबाज अहमद ने हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने तक अपनी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी.
उनका कहना था कि वे लंबे समय से जेल में हैं और अपील की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए, हालांकि जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने Friday को उनकी याचिका खारिज कर दी.
मामले के अनुसार, 13 मई 2008 को jaipur में एक के बाद एक आठ बम धमाके हुए थे. इसी दौरान चांदपोल बाजार स्थित एक गेस्ट हाउस के पास एक नौवां बम मिला था, जिसे फटने से कुछ मिनट पहले निष्क्रिय कर दिया गया था.
‘जिंदा बम’ मामले मामले में 4 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत ने मोहम्मद सरवर आजमी, शहबाज अहमद, सैफुर रहमान और मोहम्मद सैफ को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इससे पहले आठ धमाकों के मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उन फांसी की सजाओं को रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था.
बचाव पक्ष ने दलील दी कि ‘जिंदा बम’ मामले में भी वही सबूत पेश किए गए हैं, जिनके आधार पर पहले ब्लास्ट मामलों में सुनवाई हुई थी और आरोपियों को बरी कर दिया गया था.
बचाव पक्ष का कहना था कि जब समान तथ्यों पर पहले बरी किया जा चुका है, तो इस मामले में दोषसिद्धि पर सवाल उठता है.
उन्होंने लंबे समय से जेल में रहने और अपील में देरी को भी जमानत का आधार बताया.
वहीं, राज्य Government की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला आतंकवाद का है, जिसका मकसद लोगों में डर फैलाना था.
उन्होंने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर ईमेल के जरिए धमाकों की जिम्मेदारी भी ली थी.
राज्य Government ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में पहले के मामलों से अलग अतिरिक्त सबूत भी पेश किए हैं.Government ने यह भी कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 लोग घायल हुए थे.
राज्य ने अदालत से कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद Rajasthan हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही दोषियों को जमानत देने की मांग भी खारिज हो गई.
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एएमटी/वीसी