
jaipur, 13 अगस्त . Chief Minister भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई Rajasthan मंत्रिमंडल की बैठक में Thursday को कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इन प्रस्तावों में Rajasthan वृक्ष (संरक्षण) विधेयक-2026 और Rajasthan यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026 के मसौदे शामिल हैं.
प्रस्तावित वृक्ष संरक्षण विधेयक का उद्देश्य पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण करना और अवैध वृक्ष कटाई पर अंकुश लगाना है. वहीं, यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक का लक्ष्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित एक समान और पारदर्शी कानूनी ढांचा स्थापित करना है.
मंत्रिमंडल ने ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से एक संचालन एवं रखरखाव नीति को भी मंजूरी दी और सैनिकों एवं कर्मियों के कल्याण से संबंधित कई निर्णय लिए.
उपChief Minister प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल और उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री केके विश्नोई ने मंत्रिमंडल के निर्णयों के बारे में मीडिया को जानकारी दी.
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि Rajasthan के पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के तहत आगामी विधानसभा सत्र में Rajasthan वृक्ष (संरक्षण) विधेयक-2026 पेश किया जाएगा.
कैबिनेट ने इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य फूल रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरौंजी सहित 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के प्रसार और संरक्षण को बढ़ावा देना है.
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य गैर-वन भूमि पर वृक्षों की कटाई को विनियमित करना और उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करना है. प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों को संज्ञेय और जमानती श्रेणी में रखा गया है.
अवैध वृक्ष कटाई के दोषी व्यक्ति को एक वर्ष तक की कैद, 1 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत, किसी भी व्यक्ति को अधिकृत प्राधिकारी से पूर्व अनुमति के बिना अपनी स्वामित्व वाली या कब्जे वाली भूमि पर खड़े वृक्षों को काटने या कटवाने की अनुमति नहीं होगी.
यदि अनुमति से वृक्ष काटा या हटाया जाता है, तो उसी क्षेत्र में निर्धारित संख्या में प्रतिस्थापन वृक्ष लगाने होंगे.
Government ने कहा कि इन वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण आदिवासी समुदायों और रेगिस्तानी क्षेत्रों के निवासियों की आजीविका को लाभ पहुंचाएगा और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा देगा.
कैबिनेट ने Rajasthan समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 के मसौदे को भी मंजूरी दे दी, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा.
जोगाराम पटेल के अनुसार, प्रस्तावित कानून India के संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है. इसका उद्देश्य Rajasthan में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित कानूनी ढांचा स्थापित करना है.
प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा. संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले समुदायों और समूहों को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है.
इस मसौदे को Supreme Court की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर तैयार किया गया था. प्रस्तावित संहिता में विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है.
साथ ही, व्यक्तियों को अपने-अपने धर्मों और समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न करने की स्वतंत्रता बनी रहेगी, जिसमें सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज और पवित्र मिलन जैसी प्रथाएं शामिल हैं.
कानून लागू होने के बाद संपन्न होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा.
विधेयक में लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं, जिनमें दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से उनके प्रारंभ और समाप्ति की लिखित सूचना या पंजीकरण शामिल है.
विवाह या तलाक के पंजीकरण के लिए ज्ञापन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को प्रमाण पत्र जारी करना होगा या लिखित रूप में कारण बताते हुए आवेदन को अस्वीकार करना होगा.
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एमएस/